Nagpur Smart City Transparency Issues: नागपुर शहर में स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में गंभीर प्रशासनिक भ्रम और पारदर्शिता का अभाव होने का आरोप पार्षद और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य आभा पांडे ने लगाया। उन्होंने इस मामले में महानगरपालिका के आयुक्त को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, वेंडर चयन और राज्य सरकार के हालिया निर्णय के कार्यान्वयन पर तत्काल प्रभाव से 'लाइव स्टेटस रिपोर्ट' प्रस्तुत करने की मांग की है।
वेंडर चयन पर उठे गंभीर सवाल पांडे ने आयुक्त को लिखे पत्र में मुख्य रूप से 'वेंडर चयन' और प्रकल्पों के लिए पूरे कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की जानकारी भी प्रस्तुत करने की मांग की। इसी तरह से प्रोजेक्ट का मुद्दा भी उठाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस प्रोजेक्ट की प्रगति, वित्तीय लेन-देन और नागरिकों को इससे होने वाले लाभों के बारे में कोई भी जानकारी सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध नहीं है जो कि प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
पांडे ने महाराष्ट्र शासन के दिनांक 22 अप्रैल 2026 के निर्णय का हवाला देते हुए प्रशासन को घेरा है। शासन के इस निर्णय के अनुसार, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को महानगरपालिका को हस्तांतरित कर स्मार्ट सिटी कंपनी को बंद करने की कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे। पांडे ने आरोप लगाया है कि सरकार के इस आदेश के बावजूद अभी तक सभी प्रकल्प आधिकारिक तौर पर मनपा को हस्तांतरित नहीं हुए है जिससे प्रशासकीय स्तर पर भारी भ्रम की स्थिति है।
यह भी पढ़ें:-छुट्टी के दिन भी चला बुलडोजर, सीताबर्डी-इतवारी में मनपा की सख्ती; नागपुर में अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई
सरकार के आदेशों की अनदेखी और अमल में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने 'लाइव स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अपने पत्र में पांडे ने इस बात पर जोर दिया है कि सार्वजनिक निधि से बनी इन परियोजनाओं की जानकारी प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि यदि काम अधूरा है या गुणवत्ताहीन होने के बावजूद वेडर्स को बिलों का भुगतान किया गया है तो इसे अत्यंत गंभीर माना जाएगा। उन्होंने आयुक्त से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण का तत्काल उच्च स्तरीय मूल्यांकन किया जाए।