Nagpur Election Voter List Special Intensive Revision: नागपुर में एसआईआर अभियान के पहले चरण में शहर के 6 विधानसभा क्षेत्रों में 37 से 40 फीसदी मतदाताओं के नाम सूची में शामिल होने से छूट गये हैं। आगामी एक महीने का जो समय दिया गया है उसमें और कितने नाम दर्ज हो पाते हैं यह तो समय बताएगा। हां, ग्रामीण के 6 विधानसभा क्षेत्रों में जरूर शहर की अपेक्षा अच्छा काम बीएलओज ने किया है।
हालांकि पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की विस सीट वाले कामठी में 1,38,904 मतदाताओं के नाम छूट गए हैं जो कुल वोटर्स का 26.70 प्रतिशत है। यह किसी भी चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। बताते चलें कि 2024 के विस चुनाव में इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस के चीच अच्छी-खासी टक्कर हुई थी।
बावनकुले को जहां 1,74,979 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस के सुरेश भोयर ने 1,34,033 वोट हासिल किये थे। बावनकुले की जीत का अंतर 40,946 मतों का था। इस क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 5,20,329 है और उनमें से 1.39 लाख के करीब नाम हाल ही जारी की गई सूची में नहीं हैं। इसमें अल्पसंख्यक व दलित समुदाय का आधिक्य है जो निर्णायक साबित होते हैं। सूची में शामिल नहीं हो पाए वोटर्स में किसकी संख्या अधिक है यह राजनीतिक दलों के लिए अध्ययन का विषय है।
नागपुर जिले के 12 विधानसभा क्षेत्रों में उमरेड, काटोल व रामटेक में एसआईआर प्रक्रिया को अच्छा प्रतिसाद मिला। उमरेड में तो केवल 15.79 प्रतिशत नाम ही सूची से बाहर रहे। 84.21 फीसदी मतदाताओं के नाम नई सूची में शामिल हुए है।
इस सीट से बीते चुनाव में कांग्रेस के संजय मेश्राम ने बीजेपी के सुधीर पारवे को 12,825 वोटों से पराजित किया था। हालांकि इस विस क्षेत्र में 47,319 मतदाताओं के नाम शामिल होने से छूट गए हैं। रामटेक में भी 55,566 वोटर्स के नाम छूटे हैं, जबकि इस सीट पर चुनाव के जीत का अंतर 26,555 वोटों का था।
शिंदे शिवसेना के आशीष जायसवाल ने कांग्रेस के बागी राजेन्द्र मूलक को पराजित किया था। एसआईआर की दृष्टि से देखें तो दोनों आदिवासी बाहुल्य सीटों में प्रक्रिया को अच्छी कामयाबी मिली। काटोल विस क्षेत्र में भी 82.54 वोटर्स सहभागी हुए और सिर्फ 17.46 प्रतिशत का नाम सूची से बाहर हुआ है। बीते चुनाव में भाजपा के चरण सिंह ठाकुर ने राका एसपी के सलिल देशमुख को 38,816 वोटों से हराया था। यहां एसआईआर प्रक्रिया में 48,851 के नाम बाहर हुए हैं।
| सीट | विजेता पार्टी | भाजपा (मिले वोट) | मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी | मुख्य प्रतिद्वंद्वी (मिले वोट) | जीत का अंतर | सूची से बाहर मतदाता |
|---|---|---|---|---|---|---|
| काटोल | भाजपा | 104338 | राकां एसपी | 65522 | 38816 | 48851 |
| सावनेर | भाजपा | 119725 | कांग्रेस | 93324 | 26401 | 80428 |
| उमरेड | भाजपा | 72547 | कांग्रेस | 85372 | -12825 | 47319 |
| कामठी | भाजपा | 174979 | कांग्रेस | 134033 | 40946 | 138904 |
| रामटेक | भाजपा | 107967 | शिंदे सेना | 81412 | 26555 | 55566 |
| हिंगणा | भाजपा | 160206 | राकां एसपी | 81275 | 78931 | 148765 |
नागपुर जिले के सावनेर में तो बीते चुनाव में उम्मीदवारों की जीत के अंतर से 3 गुना से अधिक मतदाता सूची से बाहर हो गए है। बीते चुनाव में इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार आशीष देशमुख ने कांग्रेस की अनुजा केदार को 26,401 मतों से पराजित किया था।
एसआईआर के बाद जारी सूची में 80,428 मतदाताओं के नाम शामिल होने से रह गए हैं जो जीत के अंतर से 3 गुना से भी अधिक है। ग्रामीण भागों में सभी राजनीतिक पार्टी अपने बीएलए को अधिक सक्रियता से छूटे हुए नाम जुड़वाने के लिए प्रेरित कर रही है क्योंकि मतदाताओं की कमी भी चुनावों के परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
नागपुर जिले के 6 विस क्षेत्रों में से हिंगना क्षेत्र में एसआईआर का अभियान सर्वाधिक ढीला रहा। कुल मतदाताओं में 32 प्रतिशत के नाम ही सूची से बाहर हो गए।
इस क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 4,64,744 है जिनमें से 1,48,765 के नाम जारी की गई सूची में नहीं हैं। इनमें अधिकांश ऐसे हैं जिनके गणना फॉर्म जमा ही नहीं हुए। नागरिकों की शिकायत है कि बीएलओ घर-घर तक पहुंचे ही नहीं, जबकि निर्देशानुसार उन्हें कम से कम 3 बार जरूर आना था।
बीते चुनाव में भाजपा के समीर मेघे ने विजय हासिल की थी। उन्होंने राकां शरद पवार पार्टी के रमेशचंद्र बंग को 78,901 मतों के भारी अंतर से पराजित किया था। यह भी बताना लाजमी होगा कि इस सीट पर विपक्षी दलों ने भारी संख्या में फर्जी वोटर्स होने की शिकायत चुनाव आयोग से की थी।