प्रतीकात्मक तस्वीर (साेर्स: एआई फोटो)  
नागपुर

मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़! नागपुर में बिना फर्स्ट एड बॉक्स व अग्निशमन यंत्र के दौड़ रहीं स्कूली वैन

Nagpur School Van Safety: नागपुर में कई स्कूल बसों और वैन में फर्स्ट एड बॉक्स व अग्निशमन यंत्र नहीं हैं। जर्जर वाहनों में बच्चों का परिवहन होने से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur School Van Safety Rules: नागपुर सभी स्कूली बसों व वैन में फर्स्ट एड बॉक्स व अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य है। इसके बावजूद शहर में कई स्कूल वैन और बसों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। बच्चों को लेकर दौड़ लगाने वाली कई वैन में आग बुझाने के यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स ही नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं कई स्कूली वैन तो जर्जर हालत में भी दौड़ रही हैं।

कई बार दुर्घटनाएं होने के बावजूद वैन संचालक के साथ स्कूल वाले इस ओर अनदेखी करने पर तुले हुए हैं। चालकों द्वारा बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किये जाने के बावजूद स्कूल संचालकों द्वारा प्राइवेट वैन्स की कभी जांच नहीं की जाती है कि बच्चे किस तरह की वैन में आ रहे हैं।

रफ्तार पर भी नियंत्रण नहीं

बच्चों को लेकर दौड़ लगाने वाली वैन की रफ्तार पर भी कोई नियंत्रण नहीं है। स्कूल जल्दी पहुंचने के चक्कर में वैन चालकों की कॉम्पिटिशन चलती है। सुबह-सुबह वैन चालकों की इस तरह की लापरवाही का नजारा देखा जा सकता है। कई चालक तो सीट बेल्ट तक नहीं पहनते। दुर्घटना होने के बाद सुरक्षा को लेकर मीटिंग कर ली जाती है और कुछ दिन वैन चालकों पर नियंत्रण भी रखा जाता है, लेकिन जैसे ही नियंत्रण हटा स्थिति जस की तस बन जाती है।

कई स्कूल वैन में फर्स्ट एड बॉक्स व फायर सिस्टम केवल दिखावे के लिए लटके रहते हैं। वे शुरू भी हैं कि नहीं, इसकी कभी जांच नहीं की जाती। कई में तो यह भी देखा जाता है कि चालकों को यह तक पता नहीं रहता कि फायर सिस्टम का कैसे उपयोग करना है। आज शहर में कुछ ही स्कूल बसों व वैन में नियमों का पालन किया जा रहा है।

क्षमता से अधिक भरे जा रहे हैं बच्चे

कई वैन और ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चे भरे जा रहे हैं। ऑटो में 5 बच्चों की बजाय 9-9 बच्चे बैठाये जा रहे हैं। इसी तरह का हाल स्कूल वैन का भी देखा जा सकता है। इनमें ठूस-ठूस कर बच्चों को बैठाया जाता है। ऐसे वाहनों का कई बार चालान होने के बाद स्थिति सुधर नहीं रही।

इस तरह से वैन और ऑटो चालक बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने पर तुले हुए है। ऑटो व वैन चालकों द्वारा पालकों को बताया जाता है कि इनमें क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बिठाये जाते हैं, लेकिन पूरे बच्चे भरने के बाद ही इसकी वास्तविकता नजर आती है।

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