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सदर फ्लाईओवर के डिजाइन पर लगा ब्रेक: नितिन गडकरी की पहल रंग लाई, कलेक्टर को भेजी गई जमीन अधिग्रहण की चिट्ठी!

Sadar Flyover Design: नागपुर सदर फ्लाईओवर के दोषपूर्ण डिजाइन को सुधारने की कवायद करीब दो साल बाद पूरी हुई है। नया डिजाइन फाइनल हो गया है और अब जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

अंकिता पटेल

Nagpur Sadar Flyover Redesign: नागपुर सदर फ्लाईओवर के दोषपूर्ण डिजाइन को सुधारने की दिशा में लगभग 2 वर्षों से प्रयास हो रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की पहल के बाद इसका डिजाइन तैयार किया गया। कई बार रिजेक्ट हुआ, अब पता चला है कि डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है और उसी डिजाइन के अनुसार निर्माण कार्य होना तय है।

अधिकारियों का कहना है कि डिजाइन में कोई खोट न रहे, इसके लिए इस बार पहले से 'प्लानिंग' को काफी महत्व दिया गया। प्लानिंग पुख्ता होने के बाद अब कलेक्टर को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेज दिया गया है।

यह भी बता दिया गया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कितनी जमीन लगेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जमीन अधिग्रहण में कितना समय लगेगा क्योंकि इसके पूर्व कामठी रोड का मामला किसी से छिपा नहीं है।

कई विकल्प हुए रिजेक्ट

महा मेट्रों को डिजाइन तैयार करने, जमीन की पहचान करने और पूरी परियोजना बनाने को कहा गया था। 2 वर्ष से प्रोजेक्ट के लिए डिजाइन तैयार की जा रही थी। एक-एक चीजों पर इस बार ध्यान दिया जा रहा था। कई डिजाइन रिजेक्ट हुए, अब जाकर जो डिजाइन तैयार हुआ है, उस पर सभी ने अपनी 'सहमति' दे दी है।

अधिकारियों ने दावा किया है कि नए डिजाइन में लागत अधिक आएगी लेकिन जनता की सुविधा के लिए यह ज्यादा बेहतर होगा। गडकरी की घोषणा के अनुसार पहले 34 करोड लागत वाली डिजाइन तैयार की गई। अब लगभग 80-85 करोड़ वाला डिजाइन तैयार किया गया है।

2863 वर्ग मीटर सरकारी जमीन

प्रोजेक्ट के लिए जो अनुमान लगाया गया है, उसके अनुसार 2863 वर्ग मीटर सरकारी जमीन ली जाएगी। इसके साथ ही पेट्रोल पंप से 264 मीटर जमीन की जरूरत होगी। कुल जमीन 3117 वर्ग मीटर की जरूरत होगी, नए डिजाइन में फ्लाई ओवर आरबीआई चौक को पार करते हुए जीरो माइल के सामने उतरेगा।

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विभाग को 3117 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत

नए डिजाइन के लिए विभाग को 3117 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी। महा मेट्रो ने इसके लिए कलेक्टर को पत्र भेज दिया है। डिजाइन और प्रोजेक्ट के साथ जल्द से जल्द जमीन अधिग्रहण कर मुहैया कराने की बात कही गई है।

हालांकि इस प्रोजेक्ट के लिए जो जमीन अधिग्रहण होगी, वह 85 करोड़ में शामिल नहीं होगी। जमीन अधिग्रहण के लिए प्रशासन को अलग से राशि देनी होगी। अब यह देखना होगा कि कलेक्टर कब और कितनी जल्दी जमीन उपलब्ध करा पाते हैं, जिससे आम आदमी को राहत मिल सके।

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