Nagpur Sachchidanand Nagar NIT Ground: नागपुर शहर के मैदानों, उद्यानों व सार्वजनिक जगहों को स्वच्छ रखने, विकसित करने के दावे तो बड़े-बड़े किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत इसके उलट है। दक्षिण नागपुर के मानेवाड़ा इलाके में सच्चिदानंदनगर में एनआईटी उद्यान से लगकर ही एक मैदान भी है। इस मैदान में ग्रीन जिम व वॉकिंग ट्रैक बना हुआ है।
एक समाज भवन भी है जिसे एक गृह निर्माण सोसाइटी को दिया गया है। इस मैदान में मॉर्निंग वॉक के लिए आसपास की बस्तियों से बड़ी संख्या में नागरिक आते हैं। हालत यह है कि वॉकिंग ट्रेक पर मलबा डालकर रख दिया गया है। महीनों से यह पड़ा हुआ है जिसके कारण वॉकिंग करने वालों को दिक्कतें हो रही हैं।
ठीक समाज भवन के पीछे पेड़ों की डालियां काटकर डाल दी गई हैं। पत्ते बारिश में सड़ रहे हैं और इस कचरे से दुर्गंध उठना शुरू हो गया है। वॉकिंग करने वाले यहां स्वास्थ्य बनाने आते हैं लेकिन सफाई नहीं होने से स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम हो रहा है। इस मैदान की अव्यवस्थाओं की ओर देखने वाला कोई नहीं है।
इसी परिसर के समीप अंबिकानगर, महालक्ष्मीनगर-2 से होकर जम्बूदीपनगर का नाला गुजरता है। इस नाले के अनेक हिस्सों को स्लैब डालकर अंडरग्राउंट कर दिया गया है लेकिन महालक्ष्मीनगर-2 का छोटा सा हिस्सा अब भी खुला हुआ है। इस बरसाती नाले में गटरलाइन का गंदा पानी कई जगहों से छोड़ा जा रहा है जिसकी जांच तक नहीं की जा रही गंदे पानी से उठती दुर्गंध ने गर्मी भर बस्तियों के नागरिकों को परेशान करके रख दिया।
अब बारिश में मच्छर, मक्खी, जहरीले कीट की पैदावार बढ़ रही है। इस वर्ष इस नाले की सफाई तक नहीं की गई है। उठती दुर्गंध असहनीय हो गई है। नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ संबंधित विभाग खिलवाड़ कर रहा है।
नागरिकों ने इस संदर्भ में अनेक बार क्षेत्र के विधायक से भी शिकायत की है लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है। नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र के नगरसेवक कुंभलकर से भी शिकायत की गई लेकिन अब तो नगरसेवक ने फोन उठाना भी बंद कर दिया है।
मैदान में एक कुआं है जो सफाई के अभाव में गंदा होता जा रहा है। कुछ शरारती तत्व कुएं में प्लास्टिक कचरा फेंक रहे हैं। काई पानी की सतह पर फैल रही है। कई बार सफाई की गई लेकिन गैर जिम्मदार लोगों की हरकतों से यह बार-बार गंदा हो रहा है।
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नागरिकों की मांग है कि इस कुएं में लोहे की ग्रिल के ऊपर बारीक जाली लगा दी जाए तो कचरा फेंकने वालों की हरकतों पर लगाम लग सकती है, पूरे परिसर में बैठने के लिए केवल 2 लोहे की कुर्सियां हैं जिनके आसपास कचरा फैला है। इसकी सफाई तक नहीं की गई है। दर्जन भर कुर्सियां समाज भवन के भीतर पड़ी हुई हैं जिन्हें लगाया नहीं गया है।