शिक्षा विभाग प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

नागपुर में RTE की 25% सीटें खाली, प्रशासन की लापरवाही से 5 साल में हजारों गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित

Right to Education Vacant Seats: नागपुर में आरटीई (RTE) के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की योजना प्रशासन की लापरवाही से विफल हो रही है। हर साल सैकड़ों सीटें खाली रह जाती हैं।

प्रमोद यादव

Nagpur Education Department News: नागपुर जिला में  शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का उद्देश्य ही प्रशासन की लापरवाही के कारण विफल होता नजर आ रहा है।

पिछले 5 शैक्षणिक वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक भी वर्ष ऐसा नहीं रहा जब आरक्षित सीटों पर 100 प्रतिशत प्रवेश हुए हों। इसके विपरीत हर साल सैकड़ों सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में इस विफलता की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल अब उठने लगा है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2022-23 में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों में से 762 सीटें खाली रह गई थीं। वहीं 2023-24 में 1,482 सीटें, वर्ष 2024-25 में 1,527 सीटें रिक्त रह गई थीं। बीते वर्ष 2025-26 में 1,007 सीटें और इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 811 सीटें अब भी रिक्त हैं।

बीते 5 वर्षों में रिक्त सीटें

शैक्षणिक वर्षआरक्षित सीटेंप्रवेशरिक्त सीटेंप्रवेश प्रतिशत
2022-236186542476287.7
2023-2465775095148277.4
2024-2569205393152777.9
2025-2670065999100785.6
2026-277081627081188.5
कुल3377028181558983.5

नियोजन का दिखाई दिया अभाव

नागपुर जिला में  शिक्षा के अधिकार कानून आरटीई के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित 11 परिवारों के चच्चों को गुणवतश्पूर्ण निजी शिक्षा का अवसर देना कानून का मूल उद्देश्य है लेकिन प्रवेश प्रक्रिया में देरी, तकनीकी दिक्कते, दस्तावेजों की पूर्ति और प्रशासन की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण कई अभिभावकों को परेशानी उठानी पड़ती है।

गत वर्ष भी प्रशासन की नियोजनहीन कार्यप्रणाली के कारण प्रवेश प्रक्रिया के लंबा खिंचने की बात सामने आई थी। एक ओर आरटीई की सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं तो दूसरी ओर नागपुर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता का सवाल गंभीर होता जा रहा है।

इससे सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब आरटीई की सभी सीटें भरना प्रशासन की जिम्मेदारी है तो हर साल इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली क्यों रह जाती हैं। प्रवेश प्रक्रिया में बार-बार आने वाली दिक्कतों के लिए जिम्मेदार कौन है।

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