Nagpur Education Department News: नागपुर जिला में शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का उद्देश्य ही प्रशासन की लापरवाही के कारण विफल होता नजर आ रहा है।
पिछले 5 शैक्षणिक वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक भी वर्ष ऐसा नहीं रहा जब आरक्षित सीटों पर 100 प्रतिशत प्रवेश हुए हों। इसके विपरीत हर साल सैकड़ों सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में इस विफलता की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल अब उठने लगा है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2022-23 में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों में से 762 सीटें खाली रह गई थीं। वहीं 2023-24 में 1,482 सीटें, वर्ष 2024-25 में 1,527 सीटें रिक्त रह गई थीं। बीते वर्ष 2025-26 में 1,007 सीटें और इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 811 सीटें अब भी रिक्त हैं।
| शैक्षणिक वर्ष | आरक्षित सीटें | प्रवेश | रिक्त सीटें | प्रवेश प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 2022-23 | 6186 | 5424 | 762 | 87.7 |
| 2023-24 | 6577 | 5095 | 1482 | 77.4 |
| 2024-25 | 6920 | 5393 | 1527 | 77.9 |
| 2025-26 | 7006 | 5999 | 1007 | 85.6 |
| 2026-27 | 7081 | 6270 | 811 | 88.5 |
| कुल | 33770 | 28181 | 5589 | 83.5 |
नागपुर जिला में शिक्षा के अधिकार कानून आरटीई के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित 11 परिवारों के चच्चों को गुणवतश्पूर्ण निजी शिक्षा का अवसर देना कानून का मूल उद्देश्य है लेकिन प्रवेश प्रक्रिया में देरी, तकनीकी दिक्कते, दस्तावेजों की पूर्ति और प्रशासन की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण कई अभिभावकों को परेशानी उठानी पड़ती है।
गत वर्ष भी प्रशासन की नियोजनहीन कार्यप्रणाली के कारण प्रवेश प्रक्रिया के लंबा खिंचने की बात सामने आई थी। एक ओर आरटीई की सीटें पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं तो दूसरी ओर नागपुर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता का सवाल गंभीर होता जा रहा है।
इससे सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब आरटीई की सभी सीटें भरना प्रशासन की जिम्मेदारी है तो हर साल इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली क्यों रह जाती हैं। प्रवेश प्रक्रिया में बार-बार आने वाली दिक्कतों के लिए जिम्मेदार कौन है।