नागपुर आरटीई प्रवेश, बंद स्कूल, सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)  
नागपुर

बंद स्कूलों में कैसे होगी पढ़ाई? नागपुर में RTE प्रवेश प्रक्रिया की बड़ी लापरवाही

Nagpur RTE: नागपुर में RTE प्रवेश प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। वर्षों पहले बंद हो चुके 2 स्कूलों में बच्चों का चयन होने से अभिभावक परेशान हैं व विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

अंकिता पटेल

Nagpur RTE Admission Closed Schools: नागपुर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत प्रवेश प्रक्रिया में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से करीब चार-पांच वर्ष पहले बंद हो चुके दो स्कूलों में दो विद्यार्थियों का चयन कर दिया गया। इस चूक के कारण अभिभावकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि बच्चों का शैक्षणिक भविष्य भी अधर में लटक गया है।

आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राज्यभर में ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इसी प्रक्रिया में एकल महिला श्रेणी के दो अभिभावकों के बच्चों का चयन कोंढाली स्थित सनराइज कॉन्वेंट (यू-डायस क्रमांक 27090209011) तथा सनराइज मराठी एंड उच्च प्राथमिक स्कूल (यू-डायस क्रमांक 27090209014) में होने का संदेश मिला।

लेकिन जब अभिभावक बच्चों का प्रवेश कराने स्कूल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि दोनों विद्यालय चार से पांच वर्ष पहले ही बंद हो चुके हैं। स्कूलों की इमारतें तो मौजूद हैं, लेकिन वहां लंबे समय से किसी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही है।

दफ्तरों के चक्कर काट रहे अभिभावक

घटना सामने आने के बाद परेशान अभिभावकों ने समूह शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां भी उन्हें कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला। विभागीय लापरवाही के कारण दोनों बच्चों का अब तक किसी अन्य विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पाया है। ऐसे में उनका कक्षा पहली का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

ऑनलाइन सूची अपडेट नहीं होने पर उठे सवाल

पीड़ित अभिभावकों ने प्राथमिक शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर बच्चों का तत्काल किसी वैकल्पिक विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि वर्षों पहले बंद हो चुके स्कूलों के नाम अब तक आरटीई की ऑनलाइन सूची में कैसे बने रहे। उनका कहना है कि यदि विभाग समय पर पोर्टल और स्कूलों की जानकारी अपडेट करता, तो बच्चों और अभिभावकों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

अभिभावकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन की एक बड़ी चूक की कीमत छोटे बच्चों को चुकानी पड़ रही है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग पर है कि वह प्रभावित विद्यार्थियों को जल्द से जल्द वैकल्पिक विद्यालय में प्रवेश दिलाकर उनके शैक्षणिक वर्ष को बचाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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