RTI High Court Petition: नागपुर नेशनल ह्यूमन राइट्स रिसोर्सेज डेवलपमेंट के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता शेखर जनबंधु ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने राज्य सूचना आयुक्त के 12 सितंबर 2024 के आदेश का सख्ती से पालन करवाने और जन सूचना अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
इसके अलावा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन के उप मुख्य अभियंता और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी से मांगी गई जानकारी तुरंत उपलब्ध कराने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई गई थी।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश वाईजी खोबरागडे और न्यायाधीश एसएम घोडेस्वार ने जनहित याचिका में प्रामाणिकता साबित करने के लिए तय की गई 10 लाख रुपये की सुरक्षा जमा राशि में 9 लाख रुपये की भारी छूट दी है जिसके बाद अब उन्हें केवल 1 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले 12 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था, लेकिन विभिन्न कारणों से सुनवाई कई बार टलती रही। अदालत ने मामले का अवलोकन करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में याचिकाकर्ता के किसी भी व्यक्तिगत 'मौलिक अधिकार' के उल्लंघन का कोई दावा नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता ने यह याचिका मुख्य रूप से प्रकल्पग्रस्त नागरिकों की ओर से दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नागरिक पात्र होने के बावजूद अपने जायज अधिकारों और लाभों से वंचित हैं। इसके साथ ही यह दावा भी किया गया है कि बिजली विभाग में प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं को दिए जाने वाले मानदेय से संबंधित जानकारी आरटीआई के तहत मांगने के बावजूद उन्हें नहीं दी गई।
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कोर्ट ने शुरुआत में याचिकाकर्ता की नीयत और प्रामाणिकता साबित करने के लिए अदालत में 10 लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा करने का आदेश दिया था लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस राशि में 9 लाख रुपये की कटौती करते हुए जनबंधु को बड़ी राहत दी और मात्र 1 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अश्विन इंगोले और राज्य चुनाव आयुक्त, महाजेनको और अन्य प्रतिवादियों की ओर से एडवोकेट मोहित खजांची ने पैरवी की।