नागपुर रेलवे ऑटो बूथ, (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर स्टेशन पर अवैध ऑटो बूथ हटाया: 4 महीने की देरी, दबाव और विरोध के बाद आखिर कार्रवाई

Nagpur Illegal Auto Booth: नागपुर रेलवे स्टेशन पर अवैध घोषित प्रीपेड ऑटो बूथ को आखिरकार RPF की मौजूदगी में हटा दिया गया। पुनर्विकास में बाधा बने इस बूथ पर लंबे समय से विवाद जारी था।

अंकिता पटेल

Nagpur Dedevelopment Project: नागपुर मध्य रेल नागपुर मंडल द्वारा घोषित अवैध प्रीपेड ऑटो बूथ को आखिर हटा दिया गया। बताया जा रहा है कि स्टेशन के पश्चिमी भाग में जारी पुनर्विकास कार्य में यह बूथ लंबे समय से अड़ंगा बन रहा था। अवैध होने के बावजूद एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता रहा लेकिन हटाया नहीं गया। ज्ञात हो कि मंडल प्रबंधन द्वारा 18 दिसंबर 2025 को इसे अवैध घोषित करते हुए एक सप्ताह के भीतर हटाने का आदेश जारी किया गया था लेकिन बूथ संचालक समिति और ऑटोरिक्शा चालक अड़े रहे।

तथ डेडलाइन समाप्त होने के बाद रात 12 बजे रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी में हटाने की तैयारी भी की गई लेकिन आनन-फानन सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी के एक नेता ने दबाव लाकर कार्रवाई रुकवा दी।

बूथ संचालक समिति और ऑटोरिक्शा चालकों द्वारा मंडल प्रबंधन पर आरोप लगाया जा रहा है कि बिना नोटिस के यह कार्रवाई की गई, जबकि 4 महीने पहले ही बूथ हटाने का आदेश दिया जा चुका था लेकिन समिति और ऑटोरिक्शा चालकों ने अड़ियल रवैया जारी रखा और वे नहीं हटे। चर्चा है कि तब समिति पर सत्ताधारी नेता का हाथ था और महानगर पालिका चुनाव भी थे, बताया जा रहा है कि पश्चिमी भाग से हटाये जाने के बाद बूथ के राजनीतिक रहनुमाओं ने इसे स्टेशन के पूर्वी भाग में सेट करने की कोशिश शुरू है।

न किराये का आधार, न ही रसीद का हिसाब

जानकारी के अनुसार, नागपुर स्टेशन परिसर में यह प्रीपेड ऑटो बूध करीब 12 वर्षों से चल रहा था। हैरानी की बात यह कि इस अवधि में संचालक समिति ने ऑटोरिक्शा का किराया या अन्य किसी भी प्रकार के निर्णय में मंडल रेल प्रबंधन से अनुमति नहीं मांगी।

इस विषय पर मंडल प्रबंधन के पत्राचार का कोई जवाब भी नहीं दिया जिसमें किराया दर तय करने का आधार पूछा गया था। इस पूरी अवधि में बुध संचालक समिति द्वारा रेलवे परिसर में करीच 100 ऑटोरिक्शा की पार्किंग जितनी जगह का उपयोग किया गया, लेकिन रेलवे को कभी कोई भुगतान नहीं किया।

रेलवे की इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग

इसके अलावा, समिति पर आरोप है कि उसने बिना भुगतान के रेलवे की इलेवट्रिसिटी का अवैध तरीके से उपयोग किया, एक और मंडल प्रबंधन द्वारा स्टेशन पर बैटरी कार सुविधा प्रदाता ठेकेदार कंपनी वाहन चार्जिंग के लिए उपयोग बिजली का भुगतान करवाती है तो दूसरी ओर प्रीपेड ऑटो दूध समिति ने पिछले करीब 12 वर्षों से उपयोग की जा रही बिजली का भुगतान नहीं किया।

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