बिजली दर, कोयला खरीद, महाजेनको, उपभोक्ता, बिजली बिल, (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर: महंगे कोयले का खेल? बढ़ते बिजली बिलों पर उठे गंभीर सवाल, आखिर कौन जिम्मेदार?

Nagpur Power Tariffs: महंगे कोयले की खरीद और बढ़ती बिजली दरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ऊंची लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है जबकि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही।

अंकिता पटेल

Nagpur Electricity Bills: नागपुर जिले में आपको बिजली मिल रही है। दर काफी ज्यादा है क्योंकि महाजेनको ऊंची दाम देकर 'घटिया' कोयला खरीद रही है। नतीजा घरों तक पहुंचने वाली बिजली कई गुना अधिक दामों पर बेची जा रही है और लोगों की जेबें खाली हो रही हैं। लोगों का दम घुट रहा है, लेकिन अधिकारियों का मन नहीं पसीज रहा है।

वे जनता को 'चूसना' चाहते हैं। अधिकारी ही सिर्फ दोषी नहीं हैं। इसके लिए राजनेता भी उतने ही जिम्मेदार हैं। राजनेता इसलिए जिम्मेदार हैं क्योंकि अधिकारी मेल पर मेल भेज रहे हैं, लेकिन सुनवाई कुछ नहीं हो रही है। संस्थानों के उच्च पद पर बैठे अधिकारी भी लिप्त हैं। वे भी 'रिपोर्ट' को दरकिनार कर उल्लू सीधा कर रहे हैं।

सरकार ही सरकार की दुश्मन

आश्चर्य इस बात की है कि चूना लगाने वाला कोई बाहरी नहीं है। एक सरकारी विभाग दूसरे सरकारी विभाग को चूना लगाने में लगा हुआ है। महाजेनको सरकारी कंपनी है। वहीं महाराष्ट्र राज्य खनिज विभाग महामंडल भी राज्य सरकार का उपक्रम है। दोनों ही विभागों के मुखिया आईएएस अधिकारी है। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सरकार से 'पगार' लेते हैं। इसके बाद भी अधिकारी आंख में पट्टी बांध कर लोगों को चूना लगाने का काम कर रहे है, जनता के लिए इनमें थोड़ी भी सहानुभूति नहीं है। दोनों के अधिकारी रोजाना कोयला भेजने के पहले संयुक्त पत्र जारी करते हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि कोयले की जगह राख, मिट्टी, पत्थर और रेती भेजी जा रही है। इसके बावजूद पावर प्लांट तक कोयले के नाम पर अन्य खनिज पहुंच रहा है। उसी से बिजली तैयार भी हो रही है। यह अलग बात है कि 100 की जगह महज 10 यूनिट बिजली ही उससे बन रही है।

करोड़ों का बकाया फिर भी सप्लाई

चंद्रपुर क्षेत्र के वणी, राजूरा, घुघुस से सीएसटीपीएस, कोराडी, खापरखेडा को कोयला आपूर्ति की जा रही है। सप्लाई करने वालों का करोड़ों रुपये बकाया है, महाजेनको पेमेंट नहीं कर रही है। बावजूद कोयले की आपूर्ति जारी है। पीक वक्त में अधिकांश बिजली उत्पादन इकाइया 'हांफने' लग जाती हैं।

उप मुख्य अभियंता महाजेनको का पत्र

उप मुख्य अभियंता महाजेनको एमएसएमसी को पत्र लिखकर कहते हैं कि उन्हें जो कोयला दिया जा रहा है वह घटिया है, इसमें 75 फीसदी कोयला औसत से खराब गुणवत्ता वाला है। ब्राउन कलर की मिट्टी, रेती की भरमार है, एमएसएमसी को चाहिए कि तुरंत हस्तक्षेप करे और इस प्रकार के कोयले की लोडिग न करे, मेल में कार्यकारी निदेशक, मुख्य अभियंता, वेकोलि के अधिकारियों को भी सी.सी. में रखा गया है। यह पत्र 3 जून को लिखा-ग्या, बावजूद मिलावट का खेल जारी है।

इसी प्रकार के कई पत्र 'नवभारत' के पास हैं। 'ज्वाइंट प्रोटोकाल' के तहत महाजेनको, एमएसएमसी अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र की कॉपी भी नवभारत' के पास है। यह स्पष्ट करता है कि कोयले के खेल में सभी हाथ काले कर रहे हैं। बस जनता बेबस है और उसे जेब से 'भ्रष्टाचार' की अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

पावर प्लांट की स्थिति खराब

जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के कोयले की आपूर्ति से न सिर्फ बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि महाजेनको को प्लांट के मेंटेनेंस के लिए भी अलग से करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर कोयला अच्छा मिला, तो मेंटेनेंस खर्च भी बच सकता है, परंतु 'खेल' में ऊपर से नीचे तक सभी लिप्त हैं और बिदास यह खेल खेला जा रहा है क्योंकि उन्हें मालूम है कि उनका कोई भी 'बाल बांका' नहीं कर सकता।

साठगांठ का खुला खेल

एमएसएमसी और पावर प्लाट के अधिकारी खुले रूप से कोयले की काली कमाई करते हुए देखे जा रहे हैं परंतु एक भी विभाग का नेता इस पर हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। जानकारों का कहना है कि इस खेल में हाथ इतने 'काले' हो चुके हैं कि किसी को कुछ दिखता ही नहीं है। साठगांठ का तंत्र काफी ऊपर तक पहुंचा हुआ है।

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