सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की सफाई की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित प्रभाग के स्वच्छता निरीक्षक की होगी।
जोनल अधिकारी और सहायक आयुक्त पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
नागरिकों को गंदगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए तीन विकल्प दिए गए हैं।
NMC High Court Affidavit: नागपुर जिले में सार्वजनिक स्वच्छतागृहों की दुर्दशा को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने महानगरपालिका को स्वच्छता निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे।
इस आदेश के अनुपालन में महानगरपालिका ने हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही की रूपरेखा प्रस्तुत की है।
मनपा ने स्पष्ट किया है कि शहर के सभी सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों की साफ-सफाई और रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित प्रभाग के स्वच्छता निरीक्षक की होगी। इसके साथ ही नागरिकों से मिलने वाली शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर उनका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
नागपुर मनपा द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया कि शहर में उपलब्ध सार्वजनिक शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों तथा 'पे एंड यूज' शौचालयों की उपलब्धता, निर्माण, रखरखाव और सुविधाओं के संदर्भ में पहले ही अतिरिक्त विवरण प्रस्तुत किया जा चुका है।
अब इनकी नियमित साफ-सफाई, स्वच्छता सुविधाओं और बेहतर रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्रभाग के स्वच्छता निरीक्षकों को विशेष जिम्मेदारी दी जा रही है।
इस मामले में याचिकाकर्ता अधि। संदीप बदाना ने स्वयं अपनी याचिका की पैरवी की, जबकि महानगरपालिका की ओर से अधि। जेमिनी कासट ने अदालत में पक्ष रखा।
प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए इस पूरी कार्यप्रणाली पर संबंधित जोनल अधिकारियों और सहायक आयुक्तों को निगरानी रखने का दायित्व सौंपा गया है। जोनल अधिकारी नियमित रूप से स्वच्छता और कामकाज का निरीक्षण करेंगे ताकि प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
अस्वच्छता की शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिकों को 3 विकल्प प्रदान किए गए हैं। नागरिक संबंधित जोनल अधिकारी या सहायक आयुक्त के पास सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इसके अलावा महानगरपालिका के सार्वजनिक शिकायत निवारण पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत पर 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर उसे सुलझाने का आश्वासन मनपा ने दिया है।
नागपुर मनपा ने हलफनामे के जरिए साफ किया कि शिकायतों के निवारण में अकारण विलंब, लापरवाही या कर्तव्य में कोताही बरतने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यदि शौचालयों के रखरखाव में लापरवाही या अस्वच्छता पाई जाती है तो संबंधित स्वच्छता निरीक्षक या जोनल अधिकारी के खिलाफ लागू सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस व्यवस्था से शहर के सार्वजनिक स्वच्छतागृहों में स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद वातावरण बनने के साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी।