Prithviraj Chavan Youth Protest: 12 वर्षों में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार हिल गई है। युवाओं के आंदोलन के कारण एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया है। इस आंदोलन ने बीजेपी को सकते में डाल दिया है। उनका आत्मविश्वास हिल गया है और यह भी सोच विकसित होने लगी है कि 2029 में नरेंद्र मोदी के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता है। यही कारण है कि बीजेपी देशभर में सांसदों की तोड़फोड़ शुरू कर दी है।
बेबाक राय पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने व्यक्त किए, अपने व्यक्तिगत दौरे में सिटी में आये चव्हाण ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि यूथ ने मोदी सरकार को हिला दिया है। 12 वर्ष बाद इतना बड़ा आंदोलन हुआ है, जो बिना जाति, धर्म, समाज के था। यह यूथ का मामला था और यूथ एकजुट थे। यूथ किसी से भी प्रेरित नहीं थे और उन्होंने आंदोलन कर देश को दिखा दिया कि एकजुटता में कितनी ताकत है।
चव्हाण ने कहा 2029 के चुनाव को लेकर बीजेपी पार्टी को अब यह भरोसा नहीं रह गया है कि मोदी उनके सारर्थी बन पाएंगे और बेड़ा पार लगा पाएंगे। इसलिए विकल्प की तलाश भी शुरू हो चुकी है। उपरी तौर पर 3 नामों पर विचार भी होने लगा है।
बीजेपी अगर मोदी के नाम पर चुनाव लड़ती भी है, तो मोदी का पीएम बनना अब चुनौती से कम नहीं है। गृह मंत्री खुद को उप प्रधानमंत्री के तौर पर आगे बढ़ाने के प्रयास में है। उनका लक्ष्य अलग पीएम बनने की ओर भी है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी रेंस में बने हुए हैं। लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अब दौड़ से बाहर से हो चुके हैं।
उनके समक्ष इस्तीफा देने का दबाव काफी बढ़ गया है। सांसदों की तोड़फोड़ पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बीजेपी की चाहत यही है कि देश विपक्ष मुक्त हो जाए। यही कारण है कि शिवसेना को तोड़ने के बाद अब एनसीपी को तोड़ने का प्रयास जारी है। एनसीपी टूट जाए, तो बहुत हैरानी की बात नहीं होगी, क्योंकि सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच दिया जा रहा है।
यूपी में भी समाजवादी पार्टी को तोड़ने की खबर है। दो तिहाई बहुमत पाने के लिए बीजेपी किसी भी स्तर तक जा सकती है। दो तिहाई बहुमत उसे सिर्फ 'हिंदू एजेंडा' को आगे बढ़ाना चाह रही है। इसलिए 2029 के बाद दो ही राय वाली पार्टियां रह जाएंगी। एक हिंदी के पक्ष में होगा, जबकि दूसरा आंबेडकर और गांधी के विचारधारा वाले।
चव्हाण ने कहा कि सत्ता पक्ष के मित्र ही उन्हें बताते हैं कि जिस तरह उद्धव ठाकरे की पार्टी को तोड़ा गया, उसी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को भी तोड़ा जाएगा। गुप्त और खुली मुलाकातों के अपने अलग मायने होते हैं, जो समय आने पर स्पष्ट होते हैं।
चव्हाण ने दावा किया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कुल 3 लाख 15 हजार मतदाता थे। उद्धव ठाकरे और शरद पवार के कहने पर उन्होंने याचिका दायर की थी, जिसके बाद यह सामने आया कि कई लोगों के नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज थे, पांच विधानसभा क्षेत्रों में कई मतदाता समान पाए गए, जिससे बड़े पैमाने पर बोगस मतदान हुआ। एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद फर्जी नाम हटाए गए हैं।
खुद विज्ञान के छात्र और इंजीनियर रह चुके पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों में खराबी आ रही है और माइलेज कम हो रहा है, जिसे सरकार ने भी स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वादा किया था कि इथेनॉल के आने से पेट्रोल कम दामों पर मिलेगा, लेकिन कीमतें कम नहीं की गईं। यह जनता के साथ सीधी धोखाधड़ी है। उन्होंने मांग की कि इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को जनता से माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस पार्टी के 'संगठन सृजन' अभियान पर तीव्र असंतोष जताते हुए चव्हाण ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि भले ही यह अभियान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा चलाया गया हो, लेकिन यह पारदर्शक प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले पार्टी के भीतर मतदान कराकर जिला अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों का पारदर्शक तरीके से चयन किया जाता था, जो इस मौजूदा प्रक्रिया में नदारद है।