नागपुर में विभिन्न लंबित मामलों का होगा जल्द निपटारा (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नागपुर

विभिन्न लंबित मामलों का होगा जल्द निपटारा, विजयलक्ष्मी बिदरी ने दिए सख्त निर्देश

डिवीजनल कमिश्नर विजयलक्ष्मी बिदरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज और न्यायालय में लंबित सभी मामलों का त्वरित और समयबद्ध निपटारा किया जाए।

आंचल लोखंडे

नागपुर: डिवीजनल कमिश्नर विजयलक्ष्मी बिदरी ने सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज और न्यायालय में लंबित सभी मामलों का त्वरित और समयबद्ध निपटारा किया जाए। इसके साथ ही पीड़ितों के वारिसों को सरकारी नौकरी देने से जुड़े प्रस्ताव भी जल्द तैयार करने के आदेश दिए गए। यह बैठक विभागीय सतर्कता और नियंत्रण समिति की थी, जिसमें अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, तृतीय पंथी समुदाय के अधिकार और कल्याण, तथा जादूटोना-विरोधी कानून के प्रचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर गहन चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता स्वयं विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने की। इसमें नागपुर के जिलाधिकारी डॉ. विपीन ईटनकर, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत साखरे, डॉ. अभिजीत पाटिल और डॉ. अशोक बागुल, सामाजिक कल्याण विभाग के क्षेत्रीय आयुक्त डॉ. सिद्धार्थ गायकवाड, सहायक आयुक्त सुकेशिनी तेलगोटे सहित सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए।

अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार लंबित मामलों का जल्द निपटारा

बिदरी ने बताया कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अब तक विभाग में 8610 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनमें से 7079 मामलों को मंजूरी दी गई है। इन मामलों में पीड़ितों को कुल 68 करोड़ 97 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर प्रत्येक लंबित मामले की समीक्षा की जाए और पुलिस जांच तथा अदालतों में लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए।

साथ ही आर्थिक सहायता के लंबित मामलों के प्रस्ताव तुरंत तैयार किए जाएं। विजयलक्ष्मी बिदरी ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है। हर पीड़ित को समय पर राहत और सम्मान मिले, यह हमारी जिम्मेदारी है।

तृतीय पंथी समुदाय के अधिकारों पर विशेष ध्यान

विजयलक्ष्मी बिदरी ने कहा कि तृतीय पंथी समुदाय को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उनके लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाने के लिए शिविर आयोजित हों। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उनके लिए विशेष श्मशानभूमि की व्यवस्था की जाए और सरकारी अस्पतालों में अलग से स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हों। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें आवास मुहैया कराने के प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। “जहां तृतीय पंथी समुदाय की आबादी ज्यादा है, वहां पुलिस थानों में उनके लिए विशेष सहायता केंद्र खोले जाएं ताकि उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके।

जादूटोना-विरोधी कानून का प्रचार

बिदरी ने अधिकारियों से कहा कि जादूटोना-विरोधी कानून को सिर्फ कागजों में न रखा जाए, बल्कि इसकी जागरूकता युवाओं में फैलाई जाए। कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में विशेष अभियान चलाकर छात्रों को इस कानून की जानकारी दी जाए ताकि अंधविश्वास और कुप्रथाओं को जड़ से खत्म किया जा सके। सामाजिक न्याय विभाग के क्षेत्रीय आयुक्त डॉ. सिद्धार्थ गायकवाड ने जिलेवार आंकड़े पेश किए और अपराध की स्थिति बताई। पुलिस विभाग ने भी लंबित मामलों की प्रगति की जानकारी दी।

अंत में आयुक्त ने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और तृतीय पंथी समुदाय के हर व्यक्ति को उनका अधिकार मिले। यह सिर्फ प्रशासनिक काम नहीं बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है। यह बैठक सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है और प्रशासन ने इन निर्देशों को पूरी गंभीरता से लागू करने का भरोसा दिलाया है।

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