प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI) 
नागपुर

पेंच टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकारियों पर कानून का हंटर, रामटेक कोर्ट ने 6 दोषियों को सुनाई कड़ी जेल की सजा

Tiger Poaching Case: पेंच टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार के मामले में रामटेक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को सजा दी। यह फैसला वन्यजीव अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश है।

आकाश मसने

Tiger Poaching Case Ramtek Court Verdict: वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। पेंच टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार के गंभीर मामले में नागपुर जिले की रामटेक न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह फैसला न केवल शिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ कानूनी तंत्र की मजबूती को भी दर्शाता है।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना 12 जनवरी 2023 की है, जब पेंच टाइगर रिजर्व के 'पवनी' वन क्षेत्र में एक बाघ की बिजली का करंट लगाकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन क्षेत्र निदेशक ए. लक्ष्मी और डॉ. प्रभुनाथ शुक्ला के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई थी। वन परिक्षेत्र अधिकारी जयेश तायडे और सहायक वन संरक्षक अतुल देवकर ने इस मामले की गहन जांच की और रिकॉर्ड समय में अदालत में चार्जशीट पेश की।

न्यायालय का सख्त रुख

30 जनवरी 2026 को प्रथम श्रेणी न्याय दंडाधिकारी (रामटेक) वी.सी. वोरानी ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने पहले ही इस केस को समय सीमा के भीतर निपटाने के निर्देश दिए थे। सरकारी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन भांडेकर ने ठोस सबूतों के साथ दलीलें पेश कीं, जिससे आरोपियों का बचना नामुमकिन हो गया।

किसे कितनी मिली सजा?

न्यायालय ने सबूतों और गवाहों के आधार पर सजा को दो श्रेणियों में बांटा है। 5 मुख्य आरोपियों को 3 साल का सश्रम कारावास और 15,000 रुपये जुर्माना (जुर्माना न भरने पर 9 महीने की अतिरिक्त कैद) के साथ 2 साल की साधारण कैद और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं छठे आरोपी को 2 साल की साधारण कैद और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा मिली है।

जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का बोलबाला

इस केस को जीतने के लिए वन विभाग ने कोई कसर नहीं छोड़ी। अदालत ने फैसले के दौरान 10 गवाहों के बयान, 113 दस्तावेजी प्रमाण और 37 भौतिक साक्ष्यों पर गौर किया। पेंच टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक अक्षय गजभिये और सहायक वन संरक्षक पूजा लिमगांवकर के नेतृत्व में लोमेश ठाकरे ने कानूनी प्रक्रियाओं का सटीक पालन सुनिश्चित किया।

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