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Navbharat Impact: एनआईटी के वांजरा प्लांट में गिट्टी खरीदी का खेल उजागर, खबर छपते ही हरकत में आया प्रशासन

NIT Nagpur Hot Mix Plant: नागपुर में मनमानी शर्तों वाला टेंडर रद्द होने से सरकारी खजाने के ₹3 करोड़ बचे। 7.2% के बजाय 36% बिलो रेट पर हो रही गिट्टी की सप्लाई।

प्रिया जैस

Wanjara Plant Gitti Tender: सरकारी कार्यों में टेंडरिंग प्रक्रिया में किस तरह संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों व ठेकेदार या सप्लायरों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चूना लगाने का कारनामा किया जाता है; इसके अनेक उदाहरण सामने आते रहे हैं। कुछ खास चुनिंदा ठेकेदारों को ही ठेका देने के लिए भी कई बार टेंडर के नियम व शर्तों को बदल दिया जाता है जिससे दूसरे प्रक्रिया से बाहर ही हो जाएं।

ऐसा ही मामला उजागर हुआ था जिसमें एनआईटी ने अपने वांजरा हाट मिक्स प्लांट में क्रश्ड स्टोन मेटल यानी गिट्टी की सप्लाई के लिए करीब 10 करोड़ रुपयों का टेंडर जारी किया था। कुछ सप्लायरों ने इसमें नये सिरे से जोड़ी गई शर्तों व नियमों को अव्यावहारिक और मनमाना बताते हुए विरोध जताया था। उसके बाद उक्त टेंडर को एनआईटी चेयरमैन ने रद्द कर दिया था।

...तो हो जाता नुकसान

जिस सप्लायर को यह टेंडर दिया गया था उसने 7.2 प्रतिशत बिलोव का रेट भरा था जबकि इसके पूर्व 36 प्रतिशत बिलोव पर सप्लाई की जा रही थी। हालांकि आक्षेप जताने पर उक्त नये टेंडर को रद्द कर दिया और अब तक नया टेंडर जारी नहीं किया गया है। लेकिन एनआईटी सड़क निर्माण कार्यों के लिए सप्लायर मे. एमजी वाधवानी से 36 फीसदी बिलोव रेट पर प्लांट के लिए गिट्टी खरीद रही है। यह खरीदी नये टेंडर प्रक्रिया के पूरी होने तक की जाएगी। खरीदी दर में करीब 29 फीसदी का अंतर होने से एनआईटी के खजाने का लगभग पौने तीन से 3 करोड़ रुपये की बचत होगी। अगर 7.2 प्रतिशत बिलोव वाला टेंडर रद्द नहीं होता तो इतना ही नुकसान होता।

मनमानी शर्तें की गई थीं शामिल

दरअसल, निविदा प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जो नये नियम अनिवार्य किये गये थे उससे कई इच्छुक ठेकेदार एजेंसियां चाहकर भी भाग नहीं ले पा रही थीं। एनआईटी ने शर्त जोड़ दी थी कि सप्लायर के पास खुद की मालिकी के 8 ट्रक-टिप्पर होने चाहिए। इस शर्त ने ही कई छोटे सप्लायरों को बाहर कर दिया था। पूर्व के टेंडरों में सरकारी या अर्ध सरकारी संस्थाओं को आपूर्ति का अनुभव मान्य था लेकिन विशेष रूप से हाट मिक्स प्लांट्स को आपूर्ति करने का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया।

सप्लायरों ने बताया कि हाट मिक्स प्लांट केवल एनआईटी व एनएमसी के पास है, इसलिए इस शर्त से कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को ही लाभ पहुंचेगा। एक शर्त यह जोड़ी गई थी कि पिछले 7 वर्षों में से किसी भी लगातार 12 माह की अवधि में क्रश मेटल की एक न्यूनतम मात्रा सप्लाई का अनुभव होना चाहिए।

इसमें जो मात्रा निश्चित की गई है उससे तो किसी खास एजेंसी को ही लाभ पहुंचाने की मंशा नजर आ रही थी। इस निविदा में मात्र 3 ठेकेदारों ने भाग लिया, जिनमें से केवल 2 ही पात्र निकले थे। जब यह खबर प्रकाशित हुई तब ठेकेदारों और हाट मिक्स प्लांट के अधिकारियों के बीच कथित गठजोड़ उजागर हुआ और निविदा रद्द करनी पड़ी।

सड़क निर्माण के लिए बोर्ड ने दी अनुमति

एनआईटी द्वारा बताया गया कि नये टेंडर का प्रारूप तैयार कर तकनीकी विभाग को भेजा गया है लेकिन अभी नया आदेश नहीं आया है। एनआईटी को सिटी, कोराडी मंदिर व अन्य भागों में करीब 100 करोड़ रुपयों की लागत से सड़कों का डामरीकरण करना है। गिट्टी के अभाव में हाट मिक्स प्लांट बंद न हो, इसलिए मे. वाधवानी से पुराने निविदानुसार 36 फीसदी कम दर पर सप्लाई की बात हुई जिस पर वह सहमत हुआ।

विश्वस्त मंडल ने भी इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद गिट्टी आपूर्ति के संदर्भ में नये आदेश आने तक सप्लायर से खरीदी को मंजूरी दी है। वांजरा हाट मिक्स प्लांट के लिए मशीन क्रश्ड स्टोन मेटल की नई निविदा अब तक जारी नहीं की गई। देखना होगा कि क्या नई प्रक्रिया में अधिकारी सुधारात्मक कदम उठाते हुए सभी के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेंगे या एक बार फिर से नई शर्तों के नाम पर चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

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