उमरेड, कोयले में आग, सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

मूसलाधार बारिश में भी धधक रही WCL की खदान! उमरेड की दिनेश माइंस में 10 दिनों से लगी है आग

Umred Coal Mine Fire: उमरेड की वेकोलि मकड़धोकड़ा-3 माइंस में पिछले 10 दिनों से कोयले में आग सुलग रही है। धुआं और प्रदूषण बढ़ने से स्थानीय लोगों ने सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।

अंकिता पटेल

Makardhokda Coal Mine Fire: नागपुर झमाझम बारिश के बावजूद वेस्टर्न कोल फील्ड लि. (WCL) के उमरेड स्थित मकड़धोकड़ा-3 (दिनेश माइंस) परिसर में आग लगने की घटना सामने आयी है। बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों से कोयले में आग लगी हुई है और यह धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। आग लगने की घटना कोयला डंप करने वाले स्थान पर है जहां पर काफी बड़े पैमाने पर कोयले को स्टोर किया गया है।

प्रबंधन इन खबरों को तभी से छिपाता आ रहा है। इसे वेकोलि सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रबंधन की उपेक्षा के कारण यह घटना बड़ी होती जा रही है। आरंभ में छोटे पैमाने पर आग लगने की घटना हुई थी जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।

नजरअंदाज करने का परिणाम है कि आग एक बड़े हिस्से में फैल गयी है। अब भी प्रबंधन सचेत नहीं हुआ है। सुरक्षा के कोई कदम उठाये नहीं गए हैं। इसके कारण आसपास के क्षेत्रों में धुआं और प्रदषण तेजी से फैल रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने भी इसकी शिकायत की थी लेकिन क्षेत्र के आलाधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस प्रकार से अधिकारी उपेक्षा कर रहे हैं उससे आग और फैल जाएगी। जनता को जहां स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है वहीं वेकोलि प्रबंधन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

परिसर में डंपर और लोडर कैसे पहुंचें

वेकोलि प्रबंधन आग को कितनी गंभीरता से ले रहा है, यह एक वीडियो से जग जाहिर हो रहा है। आग की लपटों के बीच डंपर में कोयले की लोडिंग की जा रही है। डंपर और लोडर दोनों ही कार्यरत देखे जा सकते हैं। इन सभी का संचालन एक व्यक्ति कर रहा है। डंपर और लोडर में बैठे व्यक्ति की जान के साथ खिलवाड़ ही हो रहा है। लोग इसे सुरक्षा में बड़ी चूक भी मान रहे हैं। लोग यही सवाल कर रहे है कि आग लगे परिसर में डंपर और लोडर कैसे पहुंच गए।

ग्राहकों के साथ छल

सुरक्षा सुरक्ष को ताक पर रखकर आग के बीच कोयला लोड करने की जानकारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वेकोलि अपने ग्राहकों को राख हो चुका कोयला दे रहा है। इससे भी ग्राहकों के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही है। कुछ ग्राहकों ने बताया कि अच्छा कोयला लेने के लिए वे 50 से 148 फीसदी तक प्रीमियम का भुगतान करते हैं। इतनी अधिक कीमत देने के बाद भी आग में जला कोयला खदानों से बाहर निकाला जा रहा है। यह ग्राहकों के साथ सीधा-सीधा छल है।

दूसरों को स्वच्छता की सीख, घर में ही भंगार

वेकोलि स्वच्छ नागपुर, सुंदर नागपुर, पर्यावरण पर सीख देता आया है। इसके लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया भी जा रहा है। दूसरी ओर मुख्यालय ही 'भंगार' से पटा है। वेकोलि मुख्यालय में लगा साइन बोर्ड पूरी तरह से भंगार बन चुका है। यह दूसरों के लिए खतरा भी बन गया है। कबाड़ बन चुके बोर्ड से क्या संदेश प्रबंधन देता चाहता है, यह वहीं बता सकते हैं लेकिन जनता इसे देख 'तंज' जरूर मार रही है।

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