Nagpur Vidarbha State Movement Committee: विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने स्वतंत्र विदर्भराज्य के गठन की मांग को लेकर वैरायटी चौक पर आंदोलन किया। इस दौरान नागपुर करार की होली जलाई गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि विदर्भ के विकास के लिए 28 सितंबर 1953 को किया गया।
नागपुर करार विदर्भवासियों के साथ अन्याय करने वाला साबित हुआ है। अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। विदर्भ के सर्वांगीण विकास के लिए स्वतंत्र राज्य का गठन ही एकमात्र विकल्प है।
नागपुर शहर अध्यक्ष नरेश निमजे और जिलाध्यक्ष प्रशांत नखाते के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में विदर्भवादी शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार ने नागपुर करार की महत्वपूर्ण शों का पालन नहीं किया।
विदर्भ के हक की निधि और नौकरियां अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने के कारण इस क्षेत्र में सिंचाई, सड़कों और सरकारी नौकरियों का बड़ा बैकलॉग निर्माण हुआ है।
दावा किया कि विदर्भ में सिंचाई का 60,000 करोड़ रुपये, सड़कों का 15,000 करोड़ रुपये और सरकारी नौकरियों का 2,47,000 पदों का अनुशेष है। बूटीबोरी, हिंगना सहित जिले के विभिन्न स्थानों पर भी आंदोलन किया गया।
समिति ने दावा किया कि पिछले 21 वर्षों में विदर्भ में 48,000 किसानों ने आत्महत्या की है। उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए विदर्भ के युवाओं को बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
इस पलायन के कारण विदर्भ की जनसंख्या में कमी आई है जिससे लोकसभा और विधानसभा में भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व घटा है। निमजे ने कहा कि सूखे के कारण आर्थिक संकट और बढ़ने की आशंका है।
महाराष्ट्र राज्य सरकार से विदर्भ को न्याय मिलना संभव नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार बिना किसी देरी के अलग विदर्भ राज्य की घोषणा करे। आंदोलन में मुकेश मासुरकर, अरुण केदार, सुनील चोखारे, ज्योति खांडेकर, तात्यासाहेब मते, अविनाश काले, मेघा मातुरकर, गुलाबराव धांडे, अनिल केशरवानी, रवींद्र भामोडे, विजया ताजने और सुरेश वर्षे सहित विदर्भवादी कार्यकर्ता शामिल हुए।