Nagpur University External Examiner: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में महाविद्यालय स्तर पर होने वाली प्रैक्टिकल परीक्षाओं की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
मुख्य परीक्षाओं से पहले होने वाली इन परीक्षाओं में बाहरी परीक्षकों की नियुक्ति और उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। स्थिति यह है कि बाहरी परीक्षक नियुक्त होने के बावजूद कई मामलों में उनके कॉलेज पहुंचने और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल होने की प्रभावी निगरानी नहीं हो पाती।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार कई बार बाहरी परीक्षक के रूप में नियुक्त प्राध्यापक संबंधित महाविद्यालय में पहुंचने के बजाय कॉलेज प्रशासन पर ही प्रैक्टिकल परीक्षा की जिम्मेदारी छोड़ देते हैं।
दूरदराज के नागपुर जिले में नियुक्ति होने पर यह समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में परीक्षक वास्तव में परीक्षा के लिए उपस्थित हुए या नहीं, इसकी जानकारी भी विश्वविद्यालय के पास स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं रहती।
प्रैक्टिकल परीक्षा में बाहरी और आंतरिक परीक्षकों की भूमिका, उनकी नियुक्ति और निगरानी की व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय के स्तर पर पुनर्विचार की जरूरत सामने आई है। एक ओर बाहरी परीक्षक की मौजूदगी को परीक्षा की गंभीरता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है तो दूसरी ओर केवल नियुक्ति कर देने
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में परीक्षाएं अपेक्षित गंभीरता से नहीं होने की स्थिति सामने आई है। बाहरी और आंतरिक परीक्षकों के समन्वय से विद्यार्थियों को अंक दिए जाने की बात भी चर्चा में आई है। इस पर सवाल उठाया गया कि कुछ मामलों में लापरवाही होने के कारण पूरी व्यवस्था की गंभीरता पर ही सवाल नहीं उठना चाहिए।
प्रैक्टिकल परीक्षाओं की वास्तविक निगरानी, परीक्षकों की उपस्थिति और विद्यार्थियों को दिए जाने वाले अंकों की पारदर्शिता को लेकर व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
- डॉ.मनाली क्षीरसागर, उपकुलपति, नागपुर विवि