नागपुर विश्वविद्यालय समेत महाराष्ट्र में प्राध्यापक भर्ती पर फिर मंडराए संकट के बादल, हाईकोर्ट पहुंची याचिका

Nagpur Universities: वर्षों बाद शुरू हुई नागपुर समेत राज्य के कई सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की प्राध्यापक भर्ती पर हाईकोर्ट में याचिका से संकट गहराया है। दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर संशय है।
Nagpur Universities Assistant Professor Recruitment
नागपुर विश्वविद्यालयसोर्स- सोशल मीडिया
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Nagpur Universities Assistant Professor Recruitment: महाराष्ट्र राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में कई वर्षों बाद शुरू हुई प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया अब फिर अटकने के आसार हैं। प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दाखिल की गई है।

ऐसे में विश्वविद्यालयों में चल रही भर्ती प्रक्रिया के दिसंबर तक पूरा होने को लेकर संशय पैदा हो गया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में रिक्त सहायक प्राध्यापक, सहयोगी प्राध्यापक और प्राध्यापक पदों पर भर्ती को मंजूरी दी थी।

गुणवत्तापूर्ण उम्मीदवारों के चयन के लिए इस बार भर्ती प्रक्रिया में नए मानदंड शामिल किए गए। इसमें शैक्षणिक, शोध एवं अध्यापन कार्य और साक्षात्कार के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन करने का प्रावधान किया गया।

मानदंडों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया

शुरुआत में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक, शोध एवं अध्यापन कार्य के लिए 80 और साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित किए थे। विभिन्न संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया संचालित करने की मांग की। इसके बाद अंक विभाजन में बदलाव करते हुए। 75-25 का फॉर्मूला घोषित किया गया। इस पर भी आपत्तियां आने के बाद फिर बदलाव कर 60-40 का फॉर्मूला निर्धारित किया गया।

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विवि में 70 से ज्यादा पदों पर भर्ती

इसके अनुसार विश्वविद्यालयों को प्राप्त आवेदनों की छंटनी और पात्रता की जांच पूरी कर अब साक्षात्कार शुरू किए जा चुके हैं। वर्षों बाद विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी लेकिन इसी बीच इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल होने से भर्ती प्रक्रिया का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विवि में भी करीब 70 से अधिक पदों पर भर्ती होना है। भर्ती को लेकर सभी की नजरें लगी हुई है लेकिन एक के बाद एक अड़चने आने से मामला अब तक अटका हुआ है। उल्लेखनीय है कि विवि में टीचिंग वर्ग के करीब 150 से अधिक पद खाली है। यही वजह है कि सीएससी शिक्षकों के भरोसे अध्यापन व्यवस्था चलाई जा रही है।

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