नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर यूनिवर्सिटी में 'सियासी ग्रहण': प्र-उपकुलपति की कुर्सी पर सस्पेंस, क्या राजनीतिक लॉबिंग ने रोका विकास?

RTMNU Nagpur University: प्रभारियों के भरोसे नागपुर विश्वविद्यालय! प्र-उपकुलपति और 4 अधिष्ठाताओं के पद खाली, राजनीतिक खींचतान में अटकी नियुक्तियां। छात्रों का भविष्य अधर में।

प्रिया जैस

Nagpur University Exam Issue: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पटरी से उतरी परीक्षा व्यवस्था को सुचारु करने की दिशा में प्रयास तो किये जा रहे हैं, लेकिन स्थिति में जल्दी सुधार होने की उम्मीद कम ही है। अब तक प्र-उपकुलपति की नियुक्ति भी नहीं है। वहीं 4 अधिष्ठाता सहित विविध विभागों के संचालक भी नियमित नहीं हैं। प्रभारियों के भरोसे व्यवस्था चलाई जा रही है।

इस मामले में उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। विवि में नई उपकुलपति की नियुक्ति को चार महीने हो गये हैं। उम्मीद थी कि जल्द ही प्र-उपकुलपति भी मिलेगा ताकी परीक्षा व्यवस्था सहित अन्य प्रशासकीय व्यवस्था को संभालने में मददगार साबित हो सकें। करीब 20 दिन पहले प्र-उपकुलपति का नाम तय हुआ था।

चयन के लिए प्रबंधन परिषद की बैठक भी होने वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर बैठक स्थगित कर दी गई। यही वजह है कि प्र-उपकुलपति का चयन भी अटक गया। सूत्रों की मानें तो प्र-उपकुलपति के चयन को लेकर ‘राजनीतिक लाबिंग’ होने से ही मामला अटका पड़ा हुआ है। इससे व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

अधिष्ठाता भी नियमित नहीं

प्र-उपकुलपति के साथ ही फिलहाल विवि में चारों संकायों के नियमित अधिष्ठाता भी नहीं हैं। प्रभारियों के भरोसे ही कार्यभार चलाया जा रहा है। इससे भी परीक्षा सहित अन्य व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। हालांकि उच्च शिक्षा विभाग से नियुक्ति संबंधी एनओसी मिल गई है, लेकिन विज्ञापन जारी होने और साक्षात्कार होने तक 2-3 महीने का समय निकल जाएगा। तब तक नया सत्र आरंभ हो जाएगा।

इनोवेशन एंड इनक्युबेशन सेंटर के संचालक पद पर भी नियमित अधिकारी नहीं है। स्पोर्ट्स संचालक भी फुल टाइम नहीं है। विद्यार्थी विकास व कल्याण विभाग के संचालक पद पर भी अतिरिक्त कार्यभार ही चल रहा है। जून में बिल्डिंग वर्क्स विभाग के अधिकारी भी सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

परीक्षा विभाग के संचालक पद पर भी डेढ़ महीने से नियमित अधिकारी नहीं है। प्रभारियों के भरोसे 100 साल से पुराने विवि की व्यवस्था चलाई जा रही है। इसके बाद भी उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

विकास कार्यों पर असर

विश्वविद्यालय का विद्यार्थी केंद्रित होना ही उसकी रीढ़ होती है लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि उच्च शिक्षा विभाग नियुक्तियों में रुचि नहीं ले रहा है। अन्य विभागों में भी अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली हैं। सेवानिवृत कर्मचारियों को मानधन पर रखा जा रहा है।

यह व्यवस्था पिछले 2-3 वर्षों से बनी हुई है। एक ओर शैक्षणिक व्यवस्था को ऑनलाइन बनाया जा रहा है तो दूसरी ओर काम करने के लिए मैनपॉवर की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। इससे विवि के विकास में बाधा आ रही है। साथ ही गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

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