

Sambhajinagar Education Department Order: छत्रपति संभाजीनगर निर्धारित मानकों को पूरा न करने वाली अनुदानित स्कूलों को स्ववित्त पोषित (सेल्फ-फाइनेंस) करने का निर्णय लेते हुए शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल तक आवेदन अनिवार्य किया है।
तय समयसीमा में आवेदन न करने वाली स्कूलों की मान्यता स्वतः रद्द करने की चेतावनी दी गई है। इस फैसले से शिक्षा क्षेत्र में असंतोष का माहौल बन गया है। वहीं, महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल ने इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
सरकार द्वारा 1 व 2 अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार, प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ अतिरिक्त कक्षाओं को कई अवसर देने के बावजूद यदि वे आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें स्ववित्त पोषित किया जाएगा।
संबंधित स्कूलों को 30 अप्रैल तक इस मान्यता के लिए आवेदन करना अनिवार्य है, निर्धारित अवधि में आवेदन न करने वाली स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। ऐसे में उन स्कूलों के विद्यार्थियों का समायोजन 1 मई से 31 मई के बीच नजदीकी स्कूलों में किया जाएगा।
महामंडल का आरोप है कि कई स्कूलों को अपात्र घोषित करने में गंभीर त्रुटियां हुई हैं। कुछ मामलों में शिक्षा अधिकारियों व उपसंचालक की सिफारिश के बावजूद स्कूलों को अयोग्य ठहराया गया। वहीं, कई स्कूलों ने आवश्यक कमियां पूरी करने के बाद भी उन्हें मान्यता नहीं दी गई।
इसके अलावा, कुछ प्रस्ताव समय पर प्रस्तुत न होने के कारण भी स्कूल अनुदान से वंचित रह गए। महामंडल के राज्य समन्वयक प्रा. मनोज पाटील ने कहा कि यह निर्णय शिक्षा संस्थाओं के साथ अन्याय है और प्रशासनिक त्रुटियों के चलते कई स्कूलों को नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है और संस्थाओं को न्याय दिलाने के लिए अंतिम स्तर तक संघर्ष किया जाएगा।