नागपुर की सड़क पर ट्रैफिक जाम का दृश्य (फोटो नवभारत) 
नागपुर

बसों पर लगी लगाम, अब बारी ऑटो वालों की! नागपुर ट्रैफिक व्यवस्था में आएगा नया मोड़

Nagpur News: नागपुर में ट्रैफिक जाम का कारण सिर्फ बढ़ते वाहन नहीं, बल्कि नियम तोड़ते ऑटो और ट्रैवल्स की मनमानी भी है। पुलिस ने बसों पर कार्रवाई की, अब चुनौती ऑटो चालकों पर नियंत्रण की है।

आकाश मसने

Nagpur Traffic Rule News: नागपुर शहर की सड़कों पर ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था और दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण सिर्फ बढ़ते वाहन नहीं बल्कि नियमों को धता बताते ऑटो चालक और निजी ट्रैवल्स बसों की मनमानी भी है। हाल ही में शहर पुलिस ने ट्रैवल्स बसों पर शिकंजा कसते हुए इनर रिंग रोड पर पिकअप और ड्रॉप प्वाइंट पर रोक लगा दी। इसके बाद अब शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती ऑटो चालकों की लापरवाही और दबंगई को माना जा रहा है।

शहर के झांसी रानी चौक, सीताबर्डी, गिट्टीखदान, बजाजनगर, गणेशपेठ एसटी स्टैंड, मेयो और मेडिकल हॉस्पिटल, अजनी रेलवे स्टेशन, छत्रपति चौक, बर्डी और रेलवे स्टेशन परिसर जैसे प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त रहती है। यहां ऑटो चालक अपनी मनमानी पार्किंग करते हैं। बीच सड़क पर यात्रियों को उतारते-बिठाते हैं।

कई बार बिना सिग्नल देखे रास्ता काटकर दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं। ‘कैच मी इफ यू कैन’ की तर्ज पर ये चालक ट्रैफिक पुलिस को सीधी चुनौती देते हुए भाग निकलते हैं। इनके खिलाफ चालान काटने की कार्रवाई शुरू होती है तो ये पुलिस को घेरकर दबाव बनाने की कोशिश भी करते हैं।

एक प्रयास से लाखों शहरवासियों को राहत

  • नागपुर पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र कुमार सिंगल और पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) लोहित मतानी ने ट्रैफिक सुधार को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
  • डीसीपी मतानी ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए प्राइवेट ट्रैवल्स बसों पर शिकंजा कसने के लिए आदेश जारी किया है कि वे शहर की मुख्य सड़कों पर अब अनियमित पिकअप और ड्रॉप नहीं कर पाएंगी।
  • इनर रिंग रोड पर ही बसों को रुकने की अनुमति दी गई है। इससे पहले ये बसें शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में रुककर ट्रैफिक को और बाधित करती थीं।
  • यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ चुनिंदा प्वाइंट तय किए गए हैं लेकिन बस मालिकों और ड्राइवरों को भी स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • डीसीपी मतानी की सख्ती के बाद अब शहर की सड़कों और चौराहों पर प्राइवेट बसों की मनमानी पर नकेल कसी है। उनका एक प्रयास हर दिन जाम से परेशान होने वाले लाखों शहरवासियों को राहत देने वाला रहा है।

‘जहां से मन वहां से टर्न’

  • सड़क किनारे अवैध स्टैंड बनाकर बैठे ऑटो चालकों की वजह से चौक और गलियों में जाम सामान्य हो गया है।
  • रांग साइड से आकर व्यस्त सड़कों पर भी अन्य वाहन चालकों के लिए जानलेवा बनते हैं।
  • स्कूली बच्चे सवार होने के बावजूद सिग्नल जम्पिंग करके सभी की जान सांसत में ले आते हैं।
  • 'जहां से मन वहां से टर्न' को ऑटो चालक अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान चुके हैं।
  • दिन का चालान कटाकर भी कानून को ताक पर रखने में शहर के ऑटो चालक सबसे आगे हैं।
  • अधिकांश ऑटो चालक ओवरसीट चलते हैं क्योंकि यात्रियों की जान से खेलकर उन्हें मजा आता है।
  • स्टेशन और बस स्टैंड के सामने यात्रियों पर ऐसे टूट पड़ते हैं जैसे वे दुनिया के आखिरी यात्री हों।
  • ऑटो चालक इस बात का भी ध्यान नहीं रखते कि उनके सामने लड़की या महिला है।

पुलिस से बढ़ीं उम्मीदें

शहर के सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि पुलिस आयुक्त डॉ. सिंगल और डीसीपी मतानी जिस तरह बिना दबाव के ट्रैफिक सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं। उससे यह विश्वास बढ़ा है कि जल्द ही ऑटो चालकों की मनमानी पर भी लगाम कसी जाएगी। हालांकि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करना आसान काम नहीं है लेकिन पुलिस की सख्ती, प्रशासन का समर्थन और जनता का सहयोग मिलकर इस चुनौती को हल कर सकते हैं। प्राइवेट बसों के बाद अब बारी ऑटो चालकों की है। नियमों को धता बताने वाले इन चालकों के लिए अब ‘कैच मी इफ यू कैन’ वाला खेल ज्यादा दिन नहीं चलेगा।

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