नागपुर सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल सैंपल कलेक्शन (सोर्स: AI)
नागपुर

नागपुर के अस्पताल में मरीज बढ़े, सैंपल कलेक्शन की व्यवस्था नहीं; रिपोर्ट में चूक से इलाज पर मंडरा रहा खतरा

Sample Collection System In Nagpur: सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में रोज 300 सैंपल की जांच, लेकिन सीमित व्यवस्था से कक्ष नंबर 6 में भीड़ और सैंपल गड़बड़ी का खतरा, मरीजों को हो रही परेशानी।

आलोक उमाकृष्ण

SuperSpeciality Hospital Sample Collection: शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल से संलग्नित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की ओपीडी में सुबह के समय मरीजों की भारी भीड़ रहती है।

पंजीयन काउंटर से लेकर डॉक्टर को दिखाने और विभिन्न जांच कराने तक मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी ब्लड और पेशाब के सैंपल देने के दौरान हो रही है।

अस्पताल के कक्ष क्रमांक 6 में सैंपल कलेक्शन की व्यवस्था होने के कारण सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लग जाती है। मरीजों की भीड़ की वजह से कई बार सैंपल भी बदल जाते हैं। इसका रिपोर्ट पर सीधा असर पड़ता है।

सैंपल गायब होने की शिकायतें

जानकारी के अनुसार इस कक्ष में प्रति दिन करीब 300 मरीजों के सैंपल लिए जाते हैं। इनमें पैथोलॉजी विभाग के करीब 150 और बायोकेमेस्ट्री के 150 सैंपल का समावेश होता है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद सैंपल कलेक्शन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं बढ़ाई गई है।

नतीजतन एक ही कक्ष और सीमित व्यवस्था पर लगातार बढ़ता दबाव मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। सैंपल कलेक्शन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद यहां ठेकेदारी कर्मचारियों के माध्यम से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं।

ऐसे में सैंपल की पहचान, लेबलिंग, सुरक्षित रखरखाव और संबंधित मरीज तक सही रिपोर्ट पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में सैंपल में गड़बड़ी होने और सैंपल गायब होने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।

एक गलती इलाज पर भारी

यदि किसी मरीज का सैंपल गलत तरीके से दर्ज होता है, बदल जाता है या समय पर जांच के लिए नहीं पहुंचता तो उसकी रिपोर्ट की सटीकता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर मरीज के इलाज पर पड़ने की आशंका रहती है।

जांच रिपोर्ट में चूक से बढ़ सकती है मरीज की परेशानी

जांच रिपोर्ट डॉक्टर के इलाज का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में सैंपल लेने से लेकर उसकी पहचान, जांच और रिपोर्ट तैयार करने तक किसी भी स्तर पर हुई छोटी-सी गलती मरीज के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 300 सैंपल की जांच होती है, जिनमें 150 सैंपल पैथोलॉजी विभाग और 150 सैंपल बायोकेमेस्ट्री विभाग में जांचे जाते हैं।

करीब 50 फीसदी मरीजों को विभिन्न जांचों की सलाह दी जाती है। यदि किसी मरीज का सैंपल गायब हो जाए या रिपोर्ट तैयार करने में देरी हो, तो उसे दोबारा सैंपल देने के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इससे मरीज का समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। साथ ही इलाज शुरू होने या आगे की प्रक्रिया में भी देरी हो सकती है।

मरीज बढ़े, व्यवस्था वहीं की वहीं

सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में वर्षों के दौरान मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सप्ताहभर में सभी विभागों की ओपीडी में करीब 4,000 तक मरीज आते हैं। इनमें से 50 फीसदी मरीजों को विविध तरह के टेस्ट की सलाह दी जाती है। कक्ष क्रमांक 6 में दोपहर 1 बजे तक ही सैंपल लिये जाते हैं।

यदि किसी मरीज की 12.30 तक जांच हुई और उसे सैंपल देना हो तो फिर कक्ष बंद हो जाता है। इस हालत में उसे अगले दिन आना पड़ता है। यदि मरीज नागपुर शहर से बाहर का हो तो फिर उसे दिक्कतें आती है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टर प्राइवेट लैब की रिपोर्ट को मान्य नहीं करते।

व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल

प्रति दिन सैकड़ों सैंपल लिए जाने की स्थिति में सैंपल की पहचान से लेकर रिपोर्ट तैयार होने और मरीज तक पहुंचने तक प्रत्येक चरण की निगरानी बेहद जरूरी है। लेकिन कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। दरअसल व्यवस्था की योग्य तरीके से मॉनिटरिंग नहीं होने से ही अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी हुई है।

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