नागपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल,(सोर्सः AI डिजाइन फोटो) 
नागपुर

नागपुर सुपर स्पेशलिटी में मरीजों की बढ़ी आफत: MRI के लिए 20 दिन, सीटी स्कैन के लिए 10 दिन की वेटिंग!

Super Speciality Hospital: नागपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमआरआई के लिए 20 दिन, सीटी स्कैन के लिए 10 दिन और सोनोग्राफी के लिए करीब एक सप्ताह की वेटिंग से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।

अंकिता पटेल

Nagpur Super Speciality Hospital MRI Waiting: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) में किसी भी टेस्ट के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। अब यही स्थिति सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भी बनी हुई है। सुपर में एमआरआई के लिए 20 दिनों की वेटिंग चल रही है। वहीं सीटी स्कैन के लिए 10 दिन और सोनोग्राफी के लिए करीब सप्ताह भर की वेटिंग चल रही है। निदान में देरी से एक ओर जहां ओपीडी में आने वाले मरीजों को चक्कर काटना पड़ रहा है तो दूसरी ओर वार्डों में भर्ती मरीजों को बेवजह का इंतजार करना पड़ रहा है।

मेडिकल की तरह ही सुपर स्पेशलिटी में भी मरीजों की भीड़ रहती है। यहां हर विभाग की सप्ताह में दो दिन ओपीडी रहती है। आधुनिक उपचार पद्धति में हर बीमारी के इलाज के लिए विविध तरह के टेस्ट अनिवार्य हो रहे हैं लेकिन टेस्ट और टेस्ट की रिपोर्ट की प्रतीक्षा में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

इससे बीमारी के इलाज में देरी हो रही है। एमआरआई के लिए 20 दिनों की वेटिंग का सीधा मतलब है कि भर्ती मरीज को अगले नये प्रिसक्रिप्शन के लिए 20 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है।

टेस्ट में देरी से इलाज और ऑपरेशन प्रभावित

20 दिन बाद यदि शासकीय अवकाश हो या फिर कारण हो तो इंतजार और बढ़ जाता है। 1 मरीजों की संख्या अधिक इस संबंध में डॉक्टरों का कहना है कि उनका काम टेस्ट लिखकर देना है। टेस्ट कब होंगे, यह डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी विभाग का काम है। सुपर में मरीजों की संख्या की तुलना में मशीनों की कमी है। वहीं यहां महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के भी मरीज आते हैं।

इस हालत में इंतजार बढ़ना तय है। हालाकि सुपर में विभाग का नवीनीकरण होने के बाद सुविधाएं बढ़ी हैं लेकिन सीमित मैनपावर होने से जल्दी टेस्ट नहीं हो पाते। कई बार मरीज विवाद पर उतारू हो जाते हैं। सबसे अधिक दिक्कतें भर्ती होने वाले मरीजों को होती है। टेस्ट रिपोर्ट में देरी की वजह से कई बार ऑपरेशन में भी देरी होती है। इस वजह से कई बार मरीजों को एक माह से भी ज्यादा समय तक भर्ती रहना पड़ता है।

आर्थिक बोझ और परेशानी भी

अधिक दिनों तक भर्ती रहने का सीधा मतलब है कि परिजनों की परेशानी बढ़ना। एक मरीज के साथ कम से कम 2 परिजनों को रहना पड़ता है। इस हालत में उनके भोजन और अन्य खर्च भी बढ़ जाता है। अस्पताल में मरीजों को निःशुल्क भोजन मिलता है, लेकिन परिजनों को अपनी व्यवस्था खुद करनी पड़ती है। प्रशासन को चाहिए कि विविध तरह के टेस्ट कम से कम समय में हो सकें, इसके लिए योग्य नियोजन करना चाहिए।

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