महापौर नीता ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर मनपा में शपथग्रहण पर संग्राम! बिना टेंडर फूंके 15 लाख रुपये, विपक्ष ने प्रशासन को घेरा

Nagpur NMC Controversy: नागपुर मनपा में शपथ ग्रहण समारोह के खर्च पर बवाल। बिना टेंडर 15.66 लाख खर्च करने का आरोप। कांग्रेस पार्षदों ने MMC एक्ट के उल्लंघन का दावा किया।

प्रिया जैस

NMC Oath Ceremony Cost: नागपुर महानगरपालिका मुख्यालय में नये प्रमुख पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्यक्रम के लिए मंडप, शामियाना और सजावट की व्यवस्था में अनिवार्य निविदा (टेंडर) नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। नियमों को ताक पर रखकर किए गए खर्च का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्षदों ने इस मामले में महाराष्ट्र महानगरपालिका (MMC) अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम पर 15.66 लाख रुपये (13.29 लाख रुपये अनुमानित लागत और 18% जीएसटी) खर्च किए गए हैं। नियमानुसार, 10 लाख रुपये से अधिक के किसी भी काम के लिए प्रतिस्पर्धी बोली या निविदा आमंत्रित करना आवश्यक है लेकिन प्रशासन ने कथित तौर पर बिना किसी निविदा प्रक्रिया के सीधे महल क्षेत्र के एक डेकोरेटर को यह काम सौंप दिया।

प्रशासन की सफाई और विपक्ष का पलटवार

पीडब्ल्यूडी विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार प्रशासन का तर्क है कि यह काम ‘अत्यंत आवश्यक’ और ‘तत्काल’ प्रकृति का था जिसे स्थानीय नेतृत्व के निर्देशानुसार किया गया। प्रशासन का कहना है कि काम एक पंजीकृत ठेकेदार के माध्यम से कराया गया है और अब इस प्रस्ताव को औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी के लिए स्थायी समिति के समक्ष रखा जाएगा।

हालांकि पार्षदों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आपात स्थिति वैधानिक नियमों से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि काम इतना ही जरूरी था तो प्रशासन 7 दिनों की अल्पकालिक निविदा जारी कर सकता था। सीधे काम देना पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

20 करोड़ के नवीनीकरण पर भी उठे सवाल

यह मामला केवल एक समारोह तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि मनपा में 22 कार्यालयों के नवीनीकरण और महापौर, उपमहापौर व अन्य समितियों के अध्यक्षों के शपथ ग्रहण समारोहों पर कुल मिलाकर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

विपक्षी दल के पार्षदों की मानें तो अब ठेकेदार चयन प्रक्रिया, प्रशासनिक मंजूरी और खर्च के विस्तृत रिकॉर्ड की मांग की गई है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष नेता संजय महाकालकर के नेतृत्व में आगामी महासभा में भारी राजनीतिक विवाद होने की संभावना है, जहां विपक्षी दल खरीद नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।

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