नागपुर के बाजार (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर में 410 बाजार प्लॉट चिन्हित, फिर भी 3 जोन में जमीन नहीं! 52 जगहों पर फैल चुका अवैध बाजारों का कब्जा

Nagpur Municipal Corporation Market Scheme: नागपुर मनपा ने नए बाजारों के लिए 410 प्लॉट चिह्नित किए, लेकिन 3 प्रमुख जोन्स में 5,000 वर्ग मीटर की एक भी जमीन उपलब्ध नहीं। जानें शहर के बाजारों का गणित।

प्रिया जैस

Nitin Gadkari Nagpur Market Scheme: नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद महानगर पालिका ने एक लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में व्यवस्थित और संगठित बाजार विकसित करने के लिए 410 खुले भूखंडों (नजूल भूमि) की पहचान की है।

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत में ही एक बड़ी ढांचागत बाधा सामने आ गई है क्योंकि शहर के 3 प्रमुख जोन हनुमान नगर, नेहरू नगर और लकड़गंज में 5,000 वर्ग मीटर से बड़ा कोई भी सरकारी भूखंड उपलब्ध नहीं है।

बाजारों और जमीनों का असमान वितरण

मनपा द्वारा संचालित बाजारों का वर्तमान वितरण शहर में शहरी नियोजन की कमियों को उजागर कर रहा है। वर्तमान में मनपा केवल 11 अधिकृत बाजारों का संचालन कर रही है, लेकिन इनका वितरण बेहद असंतुलित है। लक्ष्मी नगर, नेहरू नगर और लकड़गंज में एक भी अधिकृत बाजार (Market Scheme) नहीं है। वहीं धरमपेठ, हनुमान नगर, गांधीबाग, आसीनगर और मंगलवारी जोन में एक-एक बाजार हैं, जबकि धंतोली और सतरंजीपुरा में 3-3 बाजार मौजूद हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, 5,000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों की उपलब्धता

जोन का नाम चिह्नित प्लॉट की संख्या स्थिति
धरमपेठ 229 सर्वाधिक उपलब्धता
लक्ष्मी नगर 56 मध्यम
मंगलवारी 40 मध्यम
आसी नगर 28 कम
गांधीबाग 26 कम
धंतोली 25 कम
सतरंजीपुरा 06 बहुत कम
हनुमान नगर, नेहरू नगर, लकड़गंज 00 गंभीर संकट

सड़कों पर अवैध बाजारों का कब्जा

जमीन की इस कमी के बीच शहर की जमीनी हकीकत यह है कि फुटपाथ, अंदरूनी सड़कें और मुख्य मार्ग अब अनौपचारिक बाजारों में तब्दील हो चुके हैं। 11 अधिकृत बाजारों (Market Scheme) के मुकाबले शहर में 52 अनधिकृत साप्ताहिक और दैनिक बाजार चल रहे हैं, जिन्होंने धीरे-धीरे स्थायी रूप ले लिया है।

जयताला, सोनेगांव, सोमलवाड़ा और रमना मारोती जैसे इलाकों में इन बाजारों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वहीं हसनबाग, वाठोड़ा, जगनाडे चौक, नरसाला, पारडी, हिवरी नगर, कडबी बाजार और हुड़केश्वर कॉलोनी में अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। मंगलवारी जोन के अंतर्गत जरीपटका और मानकापुर भी अवैध बाजारों के हॉटस्पॉट बने हुए हैं।

कार्रवाई और आगे की चुनौतियां

उच्च स्तरीय निर्देशों के बावजूद इन चिह्नित भूखंडों को कार्यात्मक बाजारों में बदलने के लिए अभी तक कोई स्पष्ट रोडमैप या समयसीमा तय नहीं की गई है। अधिकारियों का स्वीकारना है कि जनशक्ति की कमी, राजनीतिक दबाव और विक्रेताओं की आजीविका के सवालों के कारण अवैध बाजारों पर नियमित कार्रवाई करना मुश्किल होता है। अतिक्रमण हटाओ अभियान अक्सर कुछ समय के लिए ही प्रभावी होते हैं और वेंडर जल्द ही वापस लौट आते हैं।

शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि केवल जमीनों की पहचान कर लेना ही काफी नहीं है। एक विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘प्रशासन का इरादा स्पष्ट है, लेकिन जब तक समयबद्ध तरीके से विकास नहीं होता और जमीन की कमी वाले जोन्स के लिए कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक अवैध बाजारों का वर्चस्व इसी तरह बना रहेगा।’

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