नागपुर. हाई कोर्ट द्वारा कई बार आदेश देने के बाद किसी तरह अब मेडिकल अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम स्थापित नहीं हो पाया. इस संदर्भ में कड़ी फटकार लगाए जाने बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई. यहां तक कि अब हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के लिए 3 दिनों के भीतर खरीदी का टेंडर देने की जानकारी दी. गत समय अदालत ने रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के लिए 2 माह में टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने तथा उसके बाद 4 माह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के आदेश जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति को दिए थे. उल्लेखनीय है कि रोबोटिक सर्जरी सिस्टम के लिए 20.62 करोड़ रुपए मेडिकल अस्पताल के खाते में 2 सप्ताह में जमा करने के आदेश हाफकिन्स को दिए गए.
सुनवाई के दौरान विशेष वकील फिरदौस मिर्जा ने अदालत को बताया कि डिजिटल कार्डियक कैथ लैब स्थापित करने के लिए आवश्यक निधि ट्रांसफर करने के लिए मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के आयुक्त को पत्र भेजा गया है. यहां तक कि इसे स्थापित करने के लिए तकनीकी मंजूरी भी प्राप्त की जा रही है. हाई कोर्ट द्वारा 21 सिंतबर को दिए गए आदेशों का 2 सप्ताह में पालन होने की जानकारी भी सरकारी वकील ने दी. विशेषत: अदालत ने आदेश में लीनियर एक्सीलेटर मशीन और अन्य सहयोगी उपकरणों को खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू करने के आदेश भी दिए थे. अदालत ने इन उपकरणों को खरीदने के लिए महाराष्ट्र मेडिकल गुड्स प्रोक्योरमेंट अथॉरिटी को प्रस्ताव भेजने के भी आदेश दिए थे.
-23.20 करोड़ रु. सामाजिक न्याय विभाग की ओर से अन्य उपकरणों के लिए मंजूर किया गया. यह निधि आरबीआई के पास जमा है लेकिन मंजूरी के अनुसार उपकरणों की खरीद के लिए उक्त निधि उपलब्ध नहीं है. यह निधि भी मेडिकल अस्पताल के खाते में जमा करने के आदेश दिए गए.
-24.31 करोड़ का अन्य निधि भी आरबीआई के पास जमा किया गया है. राज्य सरकार को उक्त निधि जीएमसी के खाते में वापस जमा करने के आदेश दिए. उक्त निधि 4 सप्ताह में जमा करना होगा.
-डीपीडीसी निधि के अलावा जीएमसी और सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में डिजिटल कार्डियक कैथ लैब के लिए 5.67 करोड़ रुपए मंजूर है. यहां तक कि यह निधि भी आरबीआई के पास जमा की गई है. यह निधि भी जीएमसी के खाते में वापस जमा करने के आदेश दिए गए.