सुप्रिया सुले-एकनाथ शिंदे-अजित पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

अपनों ने ही छोड़ा साथ! मुंबई-पुणे के मोह में फंसे बड़े नेता, नागपुर के रण में अकेले पड़े उम्मीदवार

Nagpur NMC Election: नागपुर मनपा चुनाव में एकनाथ शिंदे, अजित पवार और सुप्रिया सुले ने नागपुर से बनाई दूरी। कार्यकर्ताओं में नाराजगी, मुंबई-पुणे को दी तरजीह।

प्रिया जैस

Maharashtra Local Body Elections: महानगर पालिका चुनाव अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। गुरुवार को मतदान और शुक्रवार को मतगणना होनी है। 3 से 13 जनवरी तक चले 10 दिनों के धुआंधार प्रचार में जहां भाजपा के दिग्गज नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी वहीं राज्य के अन्य बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को निराश किया।

बड़े नेताओं की 'गैर हाजिरी' से कार्यकर्ता नाराज

राज्य की सत्ता में शामिल महायुति के प्रमुख नेताओं में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने नागपुर में प्रचार के लिए एक दिन भी समय नहीं निकाला। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की नेता सांसद सुप्रिया सुले भी प्रचार के लिए नहीं आयीं। विदर्भ और नागपुर के प्रति विशेष प्रेम जताने वाले इन नेताओं के न आने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

मुंबई और पुणे को दी प्राथमिकता

एकनाथ शिंदे: उपमुख्यमंत्री शिंदे का पूरा ध्यान अपने गढ़ ठाणे, नवी मुंबई और देश की सबसे अमीर महानगर पालिका बीएमसी (मुंबई) पर केंद्रित रहा। शिंदे सेना के स्थानीय नेताओं ने नागपुर में कम से कम एक सभा की मांग की थी, जिसे ठुकरा दिया गया।

अजित पवार: अजित पवार ने भी पुणे और पिंपरी-चिंचवड को नागपुर से अधिक महत्व दिया। कार्यकर्ताओं के बार-बार आग्रह के बावजूद उन्होंने नागपुर आने से परहेज किया।

सुप्रिया सुले: शरद पवार गुट की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी पुणे के बाहर कदम रखना जरूरी नहीं समझा।

प्रफुल पटेल: विदर्भ से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज नेता प्रफुल पटेल ने भी केवल एक दिन निकालकर मात्र चार सभाओं में खानापूर्ति की।

ठाकरे बंधुओं का 'दिखावा' भी आया सामने

मुंबई की सत्ता और 'मराठी कार्ड' के मुद्दे पर एकजुट नजर आने वाले उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी मुंबई और ठाणे की सीमाओं में ही सिमटे रहे। राज ठाकरे प्रचार के आखिरी दिन पुणे के दौरे पर रहे, लेकिन नागपुर नहीं आए। उद्धव ठाकरे तो मुंबई से बाहर ही नहीं निकले। स्थानीय शिवसैनिकों और मनसे कार्यकर्ताओं का मानना है कि ठाकरे बंधुओं का नागपुर प्रेम महज दिखावा है।

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