चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सेाशल मीडिया) 
नागपुर

महायुति गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार, मंत्री बावनकुले बोले- नागपुर में 17 नवंबर तक तस्वीर साफ

NMC Election 2025: निकाय चुनाव के पहले चरण में महायुति गठबंधन को लेकर संशय जारी है। चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि भाजपा-शिवसेना-एनसीपी की बातचीत अंतिम चरण में है, 17 नवंबर तक तस्वीर साफ होगी।

आकाश मसने

Mahayuti Alliance In Nagpur: महाराष्ट्र निकाय चुनाव के पहले चरण में नगर परिषद व नगर पंचायतों के लिए उम्मीदवारों के पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन अब तक महायुति के घटक दल गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे या स्वबल पर यह घोषित नहीं किया गया है। इससे बीजेपी के सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं में संभ्रम की स्थिति बनी हुई है।

इस बीच राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले कहा कि भाजपा, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी की बातचीत अंतिम चरण में है और महायुति का रास्ता ही उचित है। जहां महायुति संभव नहीं होगी वहां मैत्रीपूर्ण मुकाबले के दौरान मतभेद या मनभेद न हों, इसकी पूरी सावधानी बरतने के निर्देश कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं।

भजपा के पूर्व महाराष्ट्र प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने यह भी बताया कि गठबंधन की बातचीत जारी है और पूरी पिक्चर 17 नवंबर तक क्लियर हो जाएगी। वे नागपुर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

जिला अध्यक्षों को अधिकार

भाजपा नेता बावनकुले ने बताया कि रामटेक के पदाधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की मांग की थी लेकिन उनका आवश्यक मार्गदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महायुति को लेकर जबरदस्त उत्साह है और 51 प्रतिशत वोट हासिल कर महायुति निश्चित रूप से विजयी होगी। टिकट वितरण और स्थानीय निर्णयों का अधिकार जिला अध्यक्षों व कोर कमेटी को दिया गया है।

महायुति की बातचीत जारी है और इसका पूरा चित्र 17 नवंबर तक स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चर्चा अंतिम दिन तक चलती रहेगी। भाजपा में अनुशासन है। इसलिए बगावत की संभावना बहुत कम है। कार्यकर्ताओं को समय पर टिकट की मांग करना आता है। डबल इंजन सरकार की योजनाएं स्थानीय स्वराज संस्थाओं के माध्यम से जनता तक पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य है।

ओबीसी आरक्षण पर ठोस रुख

उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार के दौरान 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण रद्द हो गया था, जो दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन महायुति सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकीलों को नियुक्त कर वह आरक्षण वापस दिलाया।

राज्य की सभी 18 पगड़ जातियों और 350 माइक्रो-ओबीसी समूहों को इस चुनाव में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। सच्चे-झूठे ओबीसी जैसी भाषा गलत है।

पूर्व मंत्री बच्चू कड़ू द्वारा चुनाव आयोग पर की गई टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर ऐसी टिप्पणी अनुचित है। जब जीतते हैं तो आयोग अच्छा लगता है और जब हारते हैं तो आरोप लगाते हैं। यह गलत प्रवृत्ति है।

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