Nagpur Solar Energy Policy: नागपुर वर्तमान बिजली टैरिफ संरचना और टाइम ऑफ डे (टीओडी) नियमों की कड़ी आलोचना करते हुए रेजिडेंशियल होटल्स एसोसिएशन के सदस्यों ने इसे पूर्णतः अनुचित, अव्यवहारिक और उद्योग विरोधी करार दिया। एनआरएचए के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह रेणु ने कहा कि नागपुर के होटल व्यवसायियों ने तत्कालीन नीतियों और एमएसईडीसीएल के साथ हुए समझौतों के आधार पर सौर ऊर्जा प्रणालियों में भारी निवेश किया था।
इस प्रकार बीच में नियमों को बदलना और उन्हें पूर्व प्रभाव से लागू करना किसी विश्वासघात से कम नहीं है। यह नीति ग्रीन एनर्जी को समर्थन देने वाले निवेशकों के लिए एक नकारात्मक संदेश है। रेणु ने कहा कि वर्तमान में टीओडी समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) होटल उद्योग के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त है क्योंकि होटलों में दिन के समय बिजली की खपत नहीं के बराबर होती है।
आयोजित सभा में एनआरएचए द्वारा सदस्यों के बिजली बिलों का गहन विश्लेषण किया गया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि टीओडी समय में होटलों की बिजली खपत केवल 4.6 प्रतिशत है, जो उत्पन्न सौर ऊर्जा का केवल 7.6 प्रतिशत ही उपयोग हो पाता है, जबकि शेष 92.4 प्रतिशत बिजली एमएसईडीसीएल को निर्यात हो जाती है।
साथ ही गंभीर बात यह कि इस नियोतित बिजली के लिए उचित भुगतान मिलने के बजाय होटल व्यवसायियों से ही 1.92 प्रति यूनिट की दर से शुल्क भी वसूला जा रहा है, जिससे सौर ऊर्जा निवेश होटल व्यवसायियों के लिए लाभ की बजाय दंड बन गया है।
एनआरएचए ने इस संदर्भ में राज्य सरकार और मर्क से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए होटलों को उद्योगों की श्रेणी में शामिल करने तथा आतिथ्य क्षेत्र के लिए टीओडी के घंटे अलग से निर्धारित करने की मांग की है, जिससे रात 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक सौर ऊर्जा के उपयोग को सक्षम बनाया जा सके।
इसके साथ ही इन सुधारों को पर्यटन नीति 2024 के साथ समन्वित करने का भी अनुरोध किया, जिससे एमएस्ईडीसीएल और आतिथ्य उद्योग दोनों के लिए एक संतुलित, व्यावहारिक और विकासोन्मुख समाधान सुनिक्षित किया जा सके।
सभा में एनआरएचए के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश त्रिवेदी, उपाध्यक्ष द्वय दीपक खुराना व अफजल मिठा, कोषाध्यक्ष विनोद जोशी, सहसचिव द्वय विशाल जायसवाल व नितिन मेहता, विजय चौरसिया, डॉ. गणेश गुप्ता, शारिक हफीज, अजय जायसवाल, चंद्रकांत चौरसिया, राजेश धार्मिक व अमित मुदलियार उपस्थित थे।
टीओडी समय सारणी में बदलाव के बाद होटलों के बिजली बिलों में 110 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खपत लगभग समान ही है। उदाहरण के तौर पर एक होटल की मार्च 2025 की में खपत 11.852 यूनिट थी, जिसका कुल बिल 2.15 लाख आया था।
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जबकि मार्च 2026 में खपत लगभग समान ही 11,840 यूनिट है। परन्तु बिल की राशि बढ़कर 4.53 लाख हो गयी। खपत में कोई विशेष वृद्धि नहीं होने के बावजूद यह बढ़ोतरी संशोधित टैरिफ संरचना को लेकर गंभीर चिताएं उत्पन्न करती है और आतिथ्य क्षेत्र पर इसके असंतुलित वितीय बोझ को दशर्शाती है।