Nagpur Indora Dighori Flyover In Danger: नागपुर शहर में इंदौरा चौक से दिघारी चौक तक निर्मित 8.9 किमी लंबे उड़ानपुल के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नागपुर को अंतरराष्ट्रीय शहर बनाने का सुअवसर देने वाली यहां की जनता का हम विकास के रूप में ऋण चुका रहे हैं।
रेशिमबाग स्थित भट सभागृह में आयोजित समारोह में उन्होंने इस पुल का नाम 'डा। केशव बलीरामपंत हेडगेवार उड़ानपुल' रखने की घोषणा की। पुल का लोकार्पण उनके व केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों हुआ।
सीएम ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की संकल्पना से उत्तर व दक्षिण नागपुर को जोड़ने वाला यह उड़ानपुल नहीं बल्कि हवाई रास्ता है। यह पुल आधुनिक तकनीक का उत्तम उदाहरण है। पुल को जो नाम दिया गया है वह सच्चे अर्थ में डॉ. हेडगेवार को आदरांजलि है।
डॉ. हेडगेवार, राजा बख्त बुलंद शाह, राजा भोसले जैसी महान हस्तियों से नागपुर की पहचान है। संघ के शताब्दी वर्ष में डॉ. हेडगेवार नाम देना, यह समर्पण की भावना है। उन्होंने कहा कि मैं नागपुरवासियों की ओर से गडकरी का आभार मानता हूं कि उन्होंने एक अनोखा पुल उपहार में दिया है।
डॉ. हेडगेवार फ्लाईओवर पर खतरा मंडराने लगा है। इंदोरा से दिघोरी को जोड़ने वाले इस फ्लाईओवर का तालमेल बिगड़ने के कारण फलाईओवर के नीचे जैक लगाए गए हैं।
पांचपावली थाने के सामने लगाए गए 2 जैक के भरोसे हजारों वाहन फ्लाईओवर पर दौड़ रहे है। वहीं फ्लाईओवर के नीचे की परत उखड़ने लगी थी। इसे लीपापोती कर छिपा दिया गया है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि फ्लाईओवर के निर्माण के बाद कुछ हिस्सों में अपेक्षित तालमेल नहीं बन पाया। इसके चलते नीचे से सपोर्ट देने की जरूरत पड़ी। हालांकि, संबंधित एजेंसी की ओर से इस संबंध में विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
नागपुर शहर में इंदौरा चौक से दिघारी चौक तक निर्मित 8.9 किमी लंबे फ्लाईओवर के नीचे की सतह की परत भी कुछ स्थानों पर उखड़ने लगी थी। बाद में इन हिस्सों पर मरम्मत का काम किया गया। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल ऊपरी स्तर पर लीपापोती कर समस्या को छिपाने की कोशिश की गई है या इसके पीछे कोई तकनीकी कारण है।
इंदोरा से दिघोरी के बीच यातायात के लिए यह फ्लाईओवर महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसकी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फ्लाईओवर के नीचे जैक लगाए जाने की वजह, इसकी भार क्षमता और निर्माण की तकनीकी स्थिति की स्वतंत्र जांच किए जाने की मांग उठ रही है।