हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

DBA Elections: नागपुर DBA चुनाव पर हाई कोर्ट सख्त! ‘एक वकील-एक वोट’ से तय होगा जिला बार एसोसिएशन का भविष्य

DBA Elections: नागपुर जिला बार एसोसिएशन (DBA) के चुनावों में भी लागू होगा ‘एक वकील-एक वोट’ का नियम। हाई कोर्ट ने HCBA को वोटर लिस्ट सौंपने के दिए निर्देश। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

प्रिया जैस

DBA Elections High Court Rules: ‘एक वकील-एक वोट’ के सिद्धांत को लागू करने की मांग करते हुए अधिवक्ता मोहन सुदामे की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर दोनों पक्षों के बीच सुनवाई के दौरान कड़े कानूनी संघर्ष के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर की बेंच ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के आगामी चुनावों में ‘एक बार, एक वोट’ के सिद्धांत को तत्काल लागू करने का आदेश दिया था।

अब निकट भविष्य में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चुनाव होने जा रहे हैं जिसे लेकर इसी नियम को लागू करने के लिए बुधवार को इसी याचिका पर फिर से सुनवाई की गई। बुधवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव के दौरान सदस्यों द्वारा दिए गए शपथपत्र और उसकी सूची डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चुनाव अधिकारी को उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए।

तो अन्य सदस्यों के मतदान की भी संभावना

सुनवाई के दौरान डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की ओर से बताया गया कि जिस तरह से हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में ‘एक वकील-एक वोट’ का फॉर्मूला लागू किया गया, उसी तरह के आदेश जारी किए जाएं। चूंकि डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन में कई दूसरे बार एसोसिएशन के भी सदस्य हैं। ऐसे में उनके द्वारा इस चुनाव में मतदान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इस पर कोर्ट का मानना था कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव के दौरान इस बार के सदस्यों ने स्वेच्छा से ‘एक वकील-एक वोट’ का पालन करते हुए इसी बार के चुनाव में मतदान किया था। यहां तक कि इसका शपथपत्र भी दिया लेकिन यह प्रक्रिया चुनाव के काफी पहले शुरू हो गई थी किंतु डीबीए की ओर से कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म होने की जानकारी के बावजूद इस तरह का कदम नहीं उठाया गया।

नीति को धीरे-धीरे लागू करने की मंशा

गत समय HCBA की ओर से 'वन बार-वन वोट' की स्थिति पर विवाद नहीं किया गया था, लेकिन तर्क दिया गया था कि इस नीति को धीरे-धीरे लागू किया जाना चाहिए क्योंकि चुनाव पहले ही घोषित हो चुके हैं। हस्तक्षेप करने वाले वकीलों ने याचिका का विरोध इस आधार पर किया था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2011 में आया था और याचिका 14 साल बाद दायर की गई है।

इसलिए इस नियम को आगामी चुनाव में लागू नहीं किया जाना चाहिए किंतु कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में पहले ही देरी हो चुकी है और 'एक बार-एक वोट' की नीति को लागू करने के लिए किसी और घटना (जैसे लखनऊ में वकीलों के अभद्र व्यवहार) का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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