निकाय चुनाव (फाइल फोटो) 
नागपुर

मनपा चुनाव से पहले कांग्रेस में भगदड़! टिकट की दावेदारी बढ़ी, गठबंधन बना ‘सिरदर्द’

Nagpur Municipal Election Congress: नागपुर मनपा चुनाव से पहले कांग्रेस में दावेदारों की होड़ बढ़ी। नेताओं की घर वापसी के बीच टिकट बंटवारा चुनौती बना। शिवसेना–एनसीपी गठबंधन फॉर्मूले पर सभी की निगाहें।

प्रिया जैस

Congress Ticket Distribution: मनपा चुनाव का आगाज होते ही अब स्थानीय नेताओं की उछल-कूद शुरू हो गई है। किसी लालच में दूसरे दलों में गए कुछ स्थानीय नेताओं की घर वापसी हो रही है, तो कुछ टिकट की फिराक में अब कांग्रेस में शामिल होते जा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कांग्रेस से शिवसेना में गए दीपक कापसे फिर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

इसी तरह से पूर्व नागपुर से गुड्डू रहांगडाले और रविनिश पांडे भी शामिल हो गए। वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भले ही भाजपा को सत्ता का दावेदार बताया जा रहा हो, किंतु इसी बीच नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

कांग्रेस में शामिल हो रहे नेता और कार्यकर्ता किसी न किसी प्रभाग से लड़ने के इच्छुक भले ही हों, किंतु पार्टी को निष्ठावान कार्यकर्ताओं का भी विचार करना होगा। यही कारण है कि टिकटों का बंटवारा करते समय शहर अध्यक्ष विकास ठाकरे को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर गठबंधन के अधिकार

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांग्रेस की ओर से गठबंधन के लिए स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया। हालांकि इस संदर्भ में प्राथमिक स्तर पर स्थानीय नेताओं के बीच बैठकों का दौर तो हुआ, किंतु किसी फॉर्मूले पर मुहर नहीं लगी। यदि भविष्य में शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की सेना साथ आती हैं, तो सीटों का फॉर्मूला तय हो पाएगा। इसके आधार पर कांग्रेस को जीतनेवाले प्रत्याशियों पर विचार करना होगा। यहां तक कि आघाड़ी का धर्म किस तरह से निभाया जाए, इसकी भी चुनौती होगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सिटी में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी का कोई बड़ा जनाधार नहीं है। दोनों दलों में विभाजन होने के कारण स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में गठबंधन को किस तरह से अंजाम दिया जाता है, यह देखने लायक होगा।

शहर अध्यक्ष की अहम भूमिका

कांग्रेस के प्रत्याशियों के चयन से लेकर अलग-अलग हिस्सों में पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेता और युवा कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल कर टिकट बंटवारे में शहर अध्यक्ष की अहम भूमिका होगी। हालांकि शहर अध्यक्ष होने के कारण विकास ठाकरे के पास अधिकार तो होंगे, किंतु लंबे समय से मनपा से सत्ता के बाहर रही कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए उन्हें ही एड़ी-चोटी का जोर भी लगाना होगा।

जानकारों की मानें तो कांग्रेस के पास सही प्रत्याशी के चयन के लिए कई विकल्प हैं। हालांकि प्रत्येक प्रभाग में दावेदार तो हैं, किंतु पार्षदों की संख्या नहीं होने से किसी तरह का दबाव नहीं होगा। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मनपा चुनाव में सभी के समन्वय से निर्णय लिए जाएंगे। पूर्व मंत्री नितिन राऊत, विधायक अभिजीत वंजारी, गिरीश पांडव सहित कई नेताओं के समर्थकों को भी जगह मिलने की संभावना है।

घटक दलों को 15-15 सीटें

हाल ही में शहर कांग्रेस अध्यक्ष विकास ठाकरे ने पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी शरद पवार गुट के नेता अनिल देशमुख से मुलाकात की थी और मनपा चुनावों को लेकर प्रारंभिक चर्चा की थी। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता सतीश हरडे ने भी कहा कि विकास ठाकरे के साथ प्रारंभिक चर्चा हुई है।

इसलिए इस बात के सकारात्मक संकेत हैं कि कांग्रेस, शरद पवार एनसीपी, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे। सतीश हरडे ने कहा कि पिछले चुनाव में शिवसेना 16 से 17 सीटों पर दूसरे स्थान पर थी। अगर गठबंधन होता है, तो संभावना है कि दोनों दलों के पास 15-15 सीटों का फॉर्मूला होगा। अगर ऐसा होता है, तो 121 सीटें कांग्रेस के पास रहेंगी।

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