Bombay High Court Nagpur Bench: नागपुर मनपा में लंबे समय तक नर्स (स्वास्थ्य कर्मचारी) के रूप में कार्य करने के बावजूद नियमित नहीं किए जाने पर धरती मोरे एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की ओर से अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद महानगरपालिका हरकत में आ गई है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधि। जेमीनी कासट ने 24 घंटे के भीतर ही 231 पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने का आश्वासन दिया।
नागपुर खण्ड पीठ में सुनवाई के दौरान अधि. कासट ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण के निर्णय को लागू करने पर अंतिम फैसला जल्द ही लिया जाएगा। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ा सवाल करते हुए पूछा कि 'जल्द ही' से प्रशासन का क्या आशय है और इसके लिए कितना समय चाहिए।
मनपा वकील ने इसके बाद मनपा के सामान्य प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त श्याम कापसे से निर्देश प्राप्त किए। कापसे ने अदालत को बताया कि संबंधित डेटा तैयार करने और प्रक्रिया पूरी करने के लिए नागपुर मनपा को 7 दिनों के समय की आवश्यकता होगी।
अदालत द्वारा समयसीमा को लेकर आगे पूछताछ किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर से निर्देश लिए गए। डॉ. सेलोकर ने अदालत को स्पष्ट रूप से सूचित किया कि निर्णय की शर्तों के अनुसार कुल 231 कर्मचारी नियमितीकरण पर विचार के लिए पात्र पाए गए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि इन 231 पात्र कर्मचारियों का प्रस्ताव आज ही राज्य सरकार को भेज दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मनपा अधिकारियों की इस कार्रवाई व ढिलाई को न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के तहत देखा जा रहा है। हाई कोर्ट द्वारा अवमानना कानून के तहत कार्रवाई का स्पष्ट संकेत दिए जाने के बाद अधिकारियों को मामले की गंभीरता और महत्ता का एहसास हुआ।