मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

अब IAS अधिकारी भी आएंगे लोकायुक्त की जांच के दायरे में, महाराष्ट्र विधानसभा ने पास किया संशोधन बिल

Maharashtra Lokayukta Amendment: महाराष्ट्र विधानसभा ने लोकायुक्त अधिनियम, 2023 को मंजूरी दी है, जिसके तहत पहली बार राज्य द्वारा नियुक्त IAS अधिकारी लोकायुक्त जांच के दायरे में आएंगे।

आकाश मसने

IAS Officers Under Lokayukta: महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के तहत, पहली बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी और राज्य द्वारा नियुक्त कई वरिष्ठ अधिकारियों को लोकायुक्त जांच के दायरे में लाया गया है।

महाराष्ट्र लोकायुक्त अधिनियम, 2023 को विधानसभा द्वारा मंजूरी दी गई। यह विधेयक लोकायुक्त संस्था के न्यायाधिकार क्षेत्र में विस्तार करता है और राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा पूर्व में उठाए गए सवालों पर स्थिति स्पष्ट करता है। इस संशोधन के तहत, पहली बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और राज्य द्वारा नियुक्त कई वरिष्ठ अधिकारियों को लोकायुक्त जांच के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने दूर की अस्पष्टता

विधेयक पेश करने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि संशोधित प्रावधानों की आवश्यकता थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोकायुक्त की जांच के दायरे में कौन से अधिकारी आते हैं, इस बारे में स्पष्टता हो। सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि इस संशोधन से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्रीय अधिनियमों के तहत गठित प्राधिकरणों में राज्य द्वारा नियुक्त आईएएस अधिकारी भी लोकायुक्त के दायरे में आएंगे। इससे मौजूदा अस्पष्टता दूर हो जाएगी। विधेयक में स्पष्ट रूप से यह निर्दिष्ट किया गया है कि संसदीय अधिनियमों के तहत स्थापित विभिन्न बोर्ड, प्राधिकरण और समितियों में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी अब लोकायुक्त जांच के दायरे में आएंगे।

लोकायुक्त और लोकपाल के क्षेत्राधिकार का सीमांकन

इस संशोधन से पहले, इस बात को लेकर अस्पष्टता थी कि क्या ऐसे प्राधिकरण लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत गठित लोकायुक्त और लोकपाल संस्था के अधिकार क्षेत्र में आते हैं या नहीं।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, केवल वे अधिकारी लोकायुक्त के दायरे में आएंगे जिन्हें केंद्रीय अधिनियमों के तहत राज्य द्वारा नियुक्त किया गया है। उन अधिकारियों को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखा गया है जिन्हें पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है और जो पहले से ही केंद्रीय लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य दोनों निकायों (लोकायुक्त और लोकपाल) के बीच अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण के संदेह को दूर करना है।

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