Electricity Rate Hike Protest:एमईआरसी की जनसुनवाई (सोर्सः सोशल मीडिया) 
नागपुर

किसी को नहीं चाहिए बिजली दर में वृद्धि, महावितरण के प्रस्ताव का कड़ा विरोध

Electricity Rate Hike Protest: एमईआरसी की जनसुनवाई में उद्योग, व्यापार और उपभोक्ता संगठनों ने महावितरण के बिजली दर वृद्धि प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे जनविरोधी और अव्यवहारिक बताया।

आंचल लोखंडे

Mahavitaran Proposal: महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) की शनिवार को आयोजित जनसुनवाई में उद्योग, व्यापार और उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने महावितरण (एमएसईडीसीएल) के प्रस्तावों का तीखा विरोध किया। वक्ताओं ने महावितरण पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए वह उपभोक्ताओं पर जबरन आर्थिक बोझ डालने का प्रयास कर रही है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि महावितरण को ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली करने के बजाय पहले उनसे वसूले गए पैसे लौटाने चाहिए। अधिक बिजली बिल, खराब आपूर्ति और बहु-लाइसेंस प्रणाली को अनुमति न देना ये सभी कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों का खुला उल्लंघन हैं। खासकर विदर्भ के उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

उद्योगों पर टैरिफ शॉक न थोपा जाए

उद्योगों की ओर से अपनी बात रखते हुए आर.बी. गोयनका ने कहा कि बहुवर्षीय टैरिफ (एमवाईटी) को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, इसके बावजूद महावितरण मनमानी पर उतरी हुई है। उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2025 को लागू किया गया टैरिफ ही उचित है और उसके बाद जुलाई से नवंबर के बीच वसूली गई अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं को लौटाई जानी चाहिए।

एमईआरसी की जनसुनवाई में प्रतिनिधियों ने सुनाई खरी-खरी

गोयनका ने 4 दिसंबर को एमएसईडीसीएल द्वारा दायर अतिरिक्त सबमिशन को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि महावितरण की गैर-पेशेवर कार्यशैली से हुए नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से कराना अनुचित है। उन्होंने उद्योग और व्यापार के हित में प्रस्तावित टैरिफ शॉक को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की।

बहु-लाइसेंस प्रणाली की मिले अनुमति

गोयनका ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में बहु-लाइसेंस प्रणाली के तहत बिजली आपूर्ति हो रही है, जिससे वहां उपभोक्ताओं को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल रही है। इसके विपरीत, विदर्भ में इस प्रणाली को जानबूझकर रोका गया है, जो उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि यदि विदर्भ में भी कई कंपनियों को बिजली आपूर्ति की अनुमति मिलेगी, तो उपभोक्ता अपनी सुविधा और दरों के अनुसार एजेंसी चुन सकेंगे। अदाणी और टोरेंट जैसी कंपनियों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में महावितरण कर्मचारियों द्वारा किए गए विरोध को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है बिजली

गोयनका ने चेतावनी दी कि यदि एमईआरसी ने महावितरण की याचिका स्वीकार की, तो राज्य में बिजली दरें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसका सबसे अधिक असर विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे पिछड़े क्षेत्रों पर पड़ेगा। पहले से ही महंगी बिजली से जूझ रहे उद्योगों की स्थिति और खराब हो जाएगी।

सोलर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ का विरोध

ऊर्जा विशेषज्ञ सुधीर बुधे ने रूफटॉप सोलर और ओपन-एक्सेस नवीकरणीय ऊर्जा उपभोक्ताओं पर लगाए जाने वाले ‘ग्रिड सपोर्ट चार्ज’ (जीएससी) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार यह शुल्क तभी लगाया जा सकता है, जब राज्य में रूफटॉप सोलर क्षमता 5,000 मेगावाट तक पहुंचे। बुधे ने आरोप लगाया कि महावितरण ने इस लक्ष्य की पूर्ति से जुड़ा कोई प्रमाणिक डेटा प्रस्तुत नहीं किया है और विरोधाभासी आंकड़े दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समीक्षा याचिका के माध्यम से इस तरह का शुल्क पिछले दरवाजे से लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए नई याचिका और अलग जनसुनवाई जरूरी है।

बैंकिंग नियमों में बदलाव से संकट

बुधे ने एनर्जी बैंकिंग और ‘टाइम ऑफ डे’ (टीओडी) एडजस्टमेंट में प्रस्तावित बदलावों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बैंकिंग को सीमित समय और उसी महीने तक बांध देने से सोलर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक व्यवहार्यता पर गंभीर असर पड़ेगा।

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