Nagpur NEET Paper Leak: नागपुर देशभर में चर्चित नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद परीक्षाओं की गोपनीयता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडल ने अब 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य बोर्ड आगामी पूरक परीक्षा (सप्लीमेंट्री एग्जाम) में प्रायोगिक तौर पर एक विषय की प्रश्नपत्रिका डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक भेजने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग कर ऑनस्क्रीन मूल्यांकन करने पर भी विचार किया जा रहा है।
राज्य बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार फरवरी-मार्च में आयोजित परीक्षा के दौरान बारामती में डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए प्रश्नपत्रिकाएं भेजने का प्रयोग किया गया था। अब इसे और आगे बढ़ाते हुए जून-जुलाई में होने वाली पूरक परीक्षा में डिजिटल प्रश्नपत्रिका वितरण प्रणाली की टेस्टिंग की जाएगी। नई व्यवस्था लागू होने पर प्रश्नपत्रिकाएं सीधे डिजिटल स्वरूप में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाई जाएंगी।
ऑनस्क्रीन मूल्यांकन की दिशा में कदम इससे प्रश्नपत्रिकाओं की पारंपरिक दुलाई और परिवहन प्रक्रिया काफी हद तक कम हो सकेगी जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके लिए राज्य बोर्ड विशेष डिजिटल सिस्टम विकसित कर रहा है। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाएगा और फिर उनका ऑनस्क्रीन मूल्यांकन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता भी ली जाएगी जिससे मूल्यांकन अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।
गौरतलब है कि इस वर्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं की परीक्षाओं में ऑनस्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग किया था। वहीं देश के कुछ विश्वविद्यालयों में भी इस तकनीक का प्रयोग पहले से किया जा रहा है। महाराष्ट्र राज्य बोर्ड फहली बार इसे प्रायोगिक स्तर पर लागू करने जा रहा है।
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ऑनलाइन उत्तर पुस्तिका जांच प्रणाली में स्कैन की गई कॉपियां सोधे परीक्षक के लॉग-इन सिस्टम में उपलब्ध होती हैं। इससे उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना आसान होता है। ऑनलाइन मूल्यांकन पारंपरिक कागजी जांच की तुलना में अधिक तेज होता है जिससे समय पर परिणाम घोषित करना संभव हो पाता है। साथ ही यह प्रक्रिया खर्च कम करने, कागज की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक साबित होती है। जरूरत पड़ने पर उत्तर पुस्तिका की कॉपी भी तुरंत उपलब्ध कराई जा सकती है।