Nagpur Lake Beautification Projects: नागपुर सिटी के ऐतिहासिक वैभव माने जाने वाले अंबाझरी का कायाकल्प हो गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी नौकायान कर यह संदेश दिया है कि अंबाझरी अब पर्यटन स्थल के रूप में अपनी ख्याति अर्जित कर सकता है। लेकिन सवाल यही उठता है कि शहर के अन्य तमाम तालाबों के दिन कब सुधरेंगे। गांधी सागर, फुटाला, सोनेगांव, लेंडी तालाब, सक्करदरा अब अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
सवाल यह नहीं है कि इन तालाबों पर काम नहीं हुआ है लेकिन इच्छाशक्ति की कमी देखी गई और तालाब वहीं के वहीं रह गए है। करोड़ों रुपये स्वाहा करने के बाद भी बदहाल स्थिति में हैं।शुक्रवारी तालाब (गांधी सागर) के सौंदर्याकरण में आ रही बाधाएं कब समाप्त होंगी? यह सवाल आज हर नागपुरवासी के मन में है। कभी इस तलाव में नौकाविहार (बोटिंग) शुरू करने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गई थीं जो अब सिर्फ एक दिवास्वप्न बनकर रह गई हैं।
राज्य सरकार और महानगरपालिका (मनपा) का पूरा ध्यान इस समय अंबाझरी तालाब के विकास पर केंद्रित है जिसके चलते भोसलेकालीन शुक्रवारी तालाब पूरी तरह उपेक्षित नजर आ रहा है। पिछले 3 दशकों से इस तालाब के सौंदर्याकरण के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन आज तक पूरा परिसर संवर नहीं पाया है। मनपा ने साल 2021 में सौंदर्याकरण का नया काम शुरू किया था जिसका पहला चरण पिछले साल पूरा हुआ जिसमें तालाब का केवल आधा काम ही हो पाया है।
पहले चरण पर लगभग 49 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें तालाब से गाद निकालना, उसकी गहराई बढ़ाना, पूर्व और उत्तर दिशा में दीवार का निर्माण और कुछ हद तक सौंदर्याकरण शामिल था।
शुक्रवारी तालाब में बोटिंग शुरू करने की घोषणाएं वर्षों पहले कई बार की गई लेकिन अब यह प्रस्ताव पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है।
गांधी सागर का पूरा इलाका ऐतिहासिक महत्व रखता है और शहर के सबसे प्रमुख राजनीतिक व सामाजिक पते इसी क्षेत्र में स्थित है। परिसर के पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शहर मुख्यालय है तो वहीं कुछ ही दूरी पर कांग्रेस का शहर मुख्यालय स्थित है। विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी इसी इलाके के बिल्कुल करीब है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का निवास स्थान (वाड़ा) और विधायक प्रवीण दटके का आवास इसी परिसर से सटे हुए है। इतने प्रमुख राजनीतिक मुख्यालयों, केंद्रीय मंत्री, विधायकों और अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों के निवास स्थान होने के बावजूद गांधी सागर तालाब का कायाकल्प न होना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
मनपा के विद्युत्त विभाग द्वारा फुटाला तालाब की तर्ज पर शुक्रवारी तालाब में भी म्यूजिकल फाउंटेन लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
रमन साइंस सेंटर के सामने पश्चिम दिशा में बड़े तामझाम के साथ खाऊ गली' (फूड स्ट्रीट) शुरू की गई थी। इसके लिए हट्स बनाए गए और स्टेडियम जैसी सीढियां खड़ी की गई जिन पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। आज इस पूरे परिसर में बड़े-बड़े झाड़ उग आए हैं और यह पूरी तरह बदहाल हो चुका है।
अब प्रशासन द्वारा 45 से 50 करोड़ रुपये का एक नया विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इसके तहत खाऊ गली का कायापालट करने, सुभाष रोड स्थित बालसदन परिसर में ऑडिटोरियम और दर्शक दीर्घा बनाने तथा रमन साइंस सेंटर के पास पार्किंग की व्यवस्था करने की योजना है।
अब तक तालाब के सौंदर्गीकरण के नाम पर 100 करोड रुपये से अधिक पानी की तरह बहाए जा चुके है लेकिन शहरवासियों को इसका कोई भी लाभ नहीं मिला। यहां आत्महत्या की घटनाओं का हवाला देकर तालाब को बंद कर दिया गया है, दीवारें और जालियां लगा दी गई।
जब तक दूसरे चरण का काम शुरू होगा तब तक पहले किया गया सौंदर्याकरण भी बर्बाद हो चुका होगा। मनपा को सभी काम जल्द पूरे करने चाहिए और इस उद्यान व तालाब को पर्यटन के लिए तुरंत खोलना चाहिए।
-गांची सागर उद्यान कल्याणकारी संस्था, अध्यक्ष, राजेश कुंभलकर