अवैध शराब कारोबार, (सोर्स: सौजन्य AI) 
नागपुर

पुणे हादसे से भी नहीं लिया सबक; नागपुर में आबकारी विभाग की नाक के नीचे धधक रही हैं जहरीली' हाथभट्टियां

Nagpur Illegal Liquor Trade: पुणे जहरीली शराब कांड के बाद भी नागपुर व आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार जारी है। ग्रामीण इलाकों में हाथभट्ठी और शहर में नकली शराब की बिक्री पर सवाल उठ रहे है।

अंकिता पटेल

Nagpur Bootlegging Spurious Liquor: नागपुर पुणे में हुए भीषण जहरीली शराब कांड के बाद भी महाराष्ट्र का आबकारी (उत्पाद शुल्क) विभाग गहरी नींद से जागने को तैयार नहीं है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध और 'जहरीली' शराब बनाने वाली भट्ठियां बिना किसी डर के चौबीसों घंटे धधक रही हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर चलाया जा रहा यह जानलेवा कारोबार किसी सुदूर जंगल में नहीं बल्कि आबकारी विभाग के अधिकारियों और इंस्पेक्टर्स की नाक के नीचे फल-फूल रहा है। जिले का कोई भी ऐसा ग्रामीण इलाका नहीं है, जहां पर हाथ भट्ठियों का खेल नहीं चल रहा है।

ग्रामीण में हाथभट्ठी है तो शहर में नकली शराब का खेल जारी है। सस्ती और दूसरे राज्यों से आने वाली शराब को महंगी बोतलों में भरकर बेचने का भयानक धंधा भी सिटी की गलियों में फल फूल रहा है। उत्पाद शुल्क विभाग एक-दो कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी झाड़ लेता है लेकिन लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो पाती।

उमरेड, पारशिवनी, हिंगणा, कलमेश्वर और भंडारा रोड जैसे प्रमुख इलाकों और इनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हाथभट्टी की जहरीली शराब बनाई और बेची जा रही है। इन क्षेत्रों में सुबह से ही अवैध ठिकानों पर नशेड़ियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। सस्ते के चक्कर में बड़ी संख्या में लोग इस 'धीमे जहर' का सेवन कर रहे हैं जिससे उनके जीवन पर हर वक्त मौत का साया मंडरा रहा है।

एसी में सोए हैं इंस्पेक्टर

क्षेत्र में इस कदर हाहाकार मचा होने के बावजूद आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर और जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठा रहे है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद है। जनता द्वारा कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी है लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। इस निक्रियता से साफ जाहिर होता है कि या तो तंत्र पूरी तरह पंगु हो चुका है या फिर इस काले कारोबार को रसूखदारों और भ्रष्ट अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है।

अन्य राज्यों से चरम पर

शराब की बढ़ती कीमतों के कारण अब राज्य में तस्करी का ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से बड़े पैमाने पर अवैध और मिलावटी शराब की खेप महाराष्ट्र की सीमाओं में धकेली जा रही है। मुख्य मागों से लेकर अंदरूनी रास्तों तक, तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि वे हर सुरक्षा जांच को धता बताकर माल खपा रहे है।

एक तरफ सरकार राजस्य बढ़ाने के दावे करती है वहीं दूसरी तरफ उसकी नाक के नीचे समानांतर रूप से चल रही यह अवैध अर्थव्यवस्था न केवल सरकारी खजाने को चूना लगा रही है बल्कि आम नागरिकों की जान से भी खिलवाड़ कर रही है। बार-बार मिल रही चेतावनियों और जन-शिकायतों को नजरअंदाज करना आबकारी विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यदि समय रहते इन अवैध भट्टियों को नष्ट नहीं किया गया और सीमा पार से हो रही तस्करी पर नकेल नहीं कसी गई तो किसी बड़े हादसे की आहट को टाला नहीं जा सकेगा, अब देखना यह है कि इस गंभीर रिपोर्ट के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी सोते रहते हैं या धरातल पर कोई सख्न एक्शन देखने को मिलता है।

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