Nagpur Illegal Hoardings Mobile Towers: नागपुर शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए अनधिकृत होर्डिंग्स और बिना अनुमति वाले मोबाइल टावरों के कारण नागरिकों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विधायक प्रवीण दटके ने इन ज्वलंत मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
विधायक दटके ने आरोप लगाया है कि सिटी की मुख्य सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग्स लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये होर्डिंग्स महाराष्ट्र नगर पालिका अधिनियम, बिल्डिंग बायलॉज और महाराष्ट्र विज्ञापन अधिनियम के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खड़े किए गए हैं।
इन अनधिकृत होर्डिंग्स के कारण न केवल शहर की सुंदरता बिगड़ रही है बल्कि यातायात अनुशासन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। दटके ने शहर के सभी अवैध होर्डिंग्स का तत्काल निरीक्षण कर उनकी सूची बनाने की मांग रखी।
साथ ही उन्होंने इन सभी होर्डिंग्स को तुरंत हटाने, जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने और होर्डिंग्स के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
अवैध होर्डिंग्स के अलावा सिटी में मोबाइल टावरों की स्थिति और भी खौफनाक है। दटके द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार सिटी में मौजूद कुल 862 मोबाइल टावरों में से 450 टावर पूरी तरह से अनधिकृत हैं। चौकाने वाली बात यह कि ये टावर निजी इमारतों पर बिना उनकी स्ट्रक्चर ऑडिट की जांच किए खड़े कर दिए गए है। इसके अलावा इन टावरों के लिए न तो अग्निशमन विभाग से अनुमति ली गई और न ही महानगर पालिका से एनओसी प्राप्त की गई।
बिना सुरक्षा मानकों और एनओसी के इमारतों पर लगे इन अवैध टावरों ने आम नागरिकों की जान को सीधे तौर पर खतरे में डाल दिया है। दटके ने सरकार से कड़ा सवाल पूछा कि यदि शहर में कोई अनुचित या दुर्घटनापूर्ण घटना घटती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? उन्होंने सरकार से अपील की कि नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोबाइल टावरों के संबंध में तत्काल एक स्पष्ट और सख्त नीति निर्धारित की जाए।
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दटके ने राज्य में मोबाइल टावरो के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के मुद्दे को भी सदन में उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले बजट सत्र में उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था।
उस समय मंत्री ने खुद सदन में स्वीकार किया था कि राज्य में मोबाइल टावरों को लेकर कोई नीति नहीं है और आश्वासन दिया था कि अगले सत्र से पहले यह नीति घोषित कर दी जाएगी। दटके ने सदन के संज्ञान में यह बात लाई कि दुर्भाग्यवश इतने समय बाद भी सरकार ने अभी तक कोई नीति नहीं बनाई।