Nagpur Census Duty 2027: नागपुर केंद्र और राज्य के निर्देशों की अनदेखी किए जाने पर हिंगना के ब्लाक शिक्षा अधिकारी को उस समय हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ गई, जब शिक्षिका नलिनी दुर्गवार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राज वाकोडे ने जनगणना ड्यूटी में लगी इस शिक्षिका के तबादले पर रोक लगा दी।
हाई कोर्ट ने 'जनगणना-2027' की ड्यूटी में तैनात जिला परिषद के सहायक शिक्षकों के न केवल तबादले बल्कि कार्य मुक्ति आदेश पर भी रोक लगा दी। याचिकाकर्ता पति-पत्नी नलिनी ज्ञानेश्वर दुर्गवार और ज्ञानेश्वर कृष्णाजी दुर्गंवार नागपुर जिला परिषद के तहत आने वाले स्कूलों में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। दोनों शिक्षकों को चार्ज अधिकारी द्वारा क्रमशः 25 अप्रैल 2026 और 23 अप्रैल 2026 को 'जनगणना 2027' के लिए प्रगणक के रूप में नियुक्त किया गया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में बताया कि भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि जनगणना-2027 की ड्यूटी में लगाए गए किसी भी कर्मचारी का तबादला नहीं किया जा सकता है। इन सख्त निर्देशों के बावजूद, हिंगना पंचायत समिति के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 21 अप्रैल 2026 को इन दोनों शिक्षकों के तबादले का आदेश जारी कर दिया।
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तबादला आदेश जारी होने के बाद हिंगना के चार्ज अधिकारी और तहसीलदार ने 27 अप्रैल 2026 को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि जनगणना नीति के तहत 31 मार्च 2027 तक इन शिक्षकों को कार्यमुक्त न किया जाए लेकिन इस निर्देश को भी दरकिनार करते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 26 मई 2026 को इन शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया।
केंद्र व राज्य सरकार के साथ-साथ तहसीलदार के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 के तबादला आदेश और 26 मई 2026 के कार्यमुक्ति आदेश, दोनों पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 तय की गई है। सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील एसएस हुलके ने पैरवी की।