हाई कोर्ट  (फाइल फोटो)
नागपुर

नागपुर में प्रदर्शनकारियों के आश्रय का मामला: हाई कोर्ट ने MSRTC को जारी किया नोटिस, जवाब दाखिल करने का आदेश

Winter Session Nagpur Protesters: नागपुर शीतकालीन सत्र में कड़ाके की ठंड में खुले आसमान तले रात बिताने वाले प्रदर्शनकारियों के मुद्दे पर HC ने सख्त रुख अपनाते हुए MSRTC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

प्रमोद यादव

Highlights

  • शीतकालीन सत्र में प्रदर्शनकारियों की परेशानी पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।

  • अदालत मित्र ने MSRTC को प्रतिवादी बनाने की मांग की।

  • हाई कोर्ट ने MSRTC को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

  • प्रदर्शनकारियों के आश्रय की स्थिति जांचने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

MSRTC High Court Notice: नागपुर राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान अपनी मांगों को लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों की दुर्दशा पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अक्षय नाईक को अदालत मित्र भी नियुक्त किया गया।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत मित्र की ओर से महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को प्रतिवादी बनाने की स्वतंत्रता मांगी गई जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने स्वतंत्रता प्रदान कर एमएसआरटीसी को नोटिस जारी कर दिया, साथ ही अदालत ने नए प्रतिवादी को जवाब दायर करने का आदेश भी दिया।

पहले ही अदालत ने कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले प्रदर्शनकारियों को तुरंत आपातकालीन और अस्थायी आश्रय गृह उपलब्ध कराने का आदेश राज्य सरकार का दिया था। 

जीवन के अधिकार में आश्रय भी शामिल

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इसके साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए जीवन के अधिकार में आश्रय भी शामिल है, इसलिए भीषण ठंड में लोगों को सुरक्षा प्रदान करना सरकार का कानूनी और नैतिक कर्तव्य है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि 1960 के नागपुर जिले में समझौते के अनुसार आयोजित होने वाले शीतकालीन सत्र का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व है।

इस दौरान विदर्भ के ग्रामीण और सुदूर इलाकों से 100 से 1,000 लोगों के बड़े समूह अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखने नागपुर आते हैं। सरकार ने इनके एकत्र होने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए स्थान तो निर्धारित किए हैं लेकिन उनके रात्रि विश्राम के लिए कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई थी।

3 सदस्यीय समिति का भी गठन

हाई कोर्ट की ओर से अधिवक्ता अभिषेक भुईभार की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति को शाम 4 से 7 बजे के बीच प्रदर्शन स्थलों का निरीक्षण करने की हिदायत दी गई थी। यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि संबंधित अधिकारी सड़कों पर रहने वाले लोगों को आश्रय गृहों तक पहुंचाने के लिए सही मार्गदर्शन दे रहे हैं या नहीं।

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