Nagpur Bombay High Court: नागपुर शहर के बस स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न कराने और अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी करने पर बाम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवीन्द्र घुगे और न्यायाधीश रोहित जोशी ने मनपा के परिवहन उपायुक्त के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
अदालत ने अधिकारी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है और स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि यह राशि करदाताओं या मनपा के फंड से नहीं बल्कि अधिकारी की अपनी सैलरी से अदालत में जमा की जाएगी।
शहर में दिव्यांग नागरिकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई व्हीलचेयर अनुकूल पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत में हो रही देरी को लेकर प्रकाश अंधारे की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सिटी बसों के रुकने के लिए उचित बस स्टॉप तक की व्यवस्था नहीं है। अदालत ने 17 फरवरी 2026 को एक आदेश पारित करते हुए मनपा को व्यवस्था सुधारने और जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया था।
जून का अंत आ चुका है लेकिन अदालत के आदेश का कोई पालन नहीं हुआ। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 4 महीने बीत जाने के बावजूद परिवहन उपायुक्त द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
अदालत ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक जवाब दाखिल करने में महीनों का समय लगाया जा रहा है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जवाब दायर करने के लिए अब अंतिम अवसर प्रदान कर 18 जुलाई तक का समय प्रदान कर 3 अगस्त तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिकाकर्ता का नागपुर मानना था कि मेसर्स जेबीएम कंपनी से मिलने वाली कुल 150 अत्याधुनिक ई-बसों में से 30 बसें नागपुर पहुंच चुकी है लेकिन चालकों और परिचालकों (कडक्टरों) को आवश्यक प्रशिक्षण न दिए जाने के कारण यह सेवा अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।
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याचिका में दिव्यांग मतदाताओं को चुनाव से पहले सुलभपरिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी, याचिका में यह तर्क दिया गया है कि यदि सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं कराया गया तो दिव्यांग नागरिक मतदान से वंचित रह सकते हैं जो उनके मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।