Godhani Gas Leak Investigation Nagpur: गोधनी नगर पंचायत में हुए क्लोरीन गैस रिसाव हादसे के बाद जहां जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया वहीं जांच दल गठित होते ही 24 घंटे के भीतर दल एक्शन मोड में आ गया। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को जांच दल के अलग-अलग विभागों के प्रतिनिधियों ने उनके अधिकार क्षेत्र अंतर्गत आने वाली खामियों का जायजा लिया जिसमें प्राथमिक स्तर पर लापरवाही के कई तथ्य उजागर हुए हैं।
गोधनी नगर परिषद और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) द्वारा संचालित क्लोरीनेशन प्लांट में सुरक्षा मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं की भारी अनदेखी का मामला सामने आया है। तकनीकी जांच समिति की प्राथमिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि प्लांट के संचालन, अनुमतियों और लेआउट में कई गंभीर खामियां हैं।
प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए नगर परिषद से आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। जांच समिति ने टेंडर के पूरे स्पेसिफिकेशन, प्लांट की विस्तृत जानकारी और अप्रूवल से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं।
यह भी जांच का मुख्य विषय है कि महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने प्लांट के प्लान को मंजूरी देते समय आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए थे या नहीं।
आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का प्लांट निश्चित ही आवासीय क्षेत्र के बाहर होना चाहिए कितु यह आबादी के बीच में पाया गया है। नगर परिषद क्षेत्र में कहीं भी इतनी बड़ी खुली जगह नहीं है। ऐसे में लेआउट ही मंजूर है या नहीं? इसे लेकर भी आशंका है जिससे पूरा मामला ही खंगाला जा रहा है। यहां तक कि प्लांट निर्मित करने से पूर्व नगर परिषद की ओर से मंजूरी ली गई थी या नहीं? इसका जवाब भी खोजा जा रहा है।
सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने उन्हें आवश्यक दस्तावेज और अन्य मुद्दों को भांप लिया है। अब 2 दिनों के भीतर 27 अगस्त को जिलाधिकारी को - रिपोर्ट सौंपी जाएगी जिसके बाद जिलाधिकारी सभी विभागों की रिपोर्ट को एकत्रित कर निष्कर्ष निकाल सकेंगे। - इस पूरी समीक्षा ने स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक सुरक्षा के मामले में दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की - बारीकी से जांच की जा रही है। जांच समिति के सामने जल्द ही सारे तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे जिससे यह तय - होगा कि सुरक्षा नियमों में कहां और किसकी ओर से चूक हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एमजेपी की ओर से इस प्रकल्प को पूरा किया गया किंतु नगर परिषद को सौंपा नहीं गया था। आश्चर्यजनक यह है कि नगर परिषद को प्रकल्प हस्तांतरित करने से पूर्व कुछ नेताओं के दबाव में हाल ही के गर्मी में इसका संचालन भी किया गया जिसके
बाद इसे पुनः बंद कर दिया गया था। चूंकि प्रकल्प हस्तांतरित नहीं हुआ था, ऐसे में प्रकल्प की पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके अलावा समिति इस बात की जांच कर रही है कि क्या डेवलपमेंट प्लान या लेआउट में इस प्लांट के लिए कोई जगह आरक्षित की गई थी या नहीं, क्योंकि जानकारी के मुताबिक वहां तक पहुंचने के लिए छोटे रास्ते या उचित सड़क भी नहीं थी।