ट्रैफिक जाम की तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

नागपुर के महल से इतवारी तक जाम ही जाम, दिवाली पर बाजारों में प्रशासन व्यवस्था भगवान भरोसे

Nagpur Diwal Traffic Jam: दीवाली खरीदारी के बीच नागपुर के मुख्य बाजारों में भारी ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण से लोग परेशान हैं। प्रशासन की नाकामी पर नागरिकों और नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा है।

प्रमोद यादव

Highlights

  • दिवाली की खरीदारी के कारण नागपुर के प्रमुख बाजारों में ट्रैफिक का दबाव बढ़ा।

  • महल, इतवारी, गांधीबाग, जरीपटका, सदर और धरमपेठ में जाम की शिकायतें।

  • पूर्व कॉर्पोरेटर संजय बालपांडे ने मनपा के प्रवर्तन विभाग पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाया।

  • नागरिकों ने त्योहार से पहले ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारी नहीं होने पर नाराजगी जताई।

Nagpur Market Badhal Mahal Itwari Gandhibag Traffic: एक ओर त्योहार का सीजन चरम पर है वहीं पुरानी बदहाली भी कायम है। दिवाली की खरीदारी के चलते प्रमुख बाजारों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ट्रैफिक पुलिस और नागपुर महानगरपालिका (मनपा) की लापरवाही का आलम यह है कि शहर की सड़कों पर भारी जाम लगा हुआ है लेकिन इसे संभालने के लिए कोई पुख्ता ब्लूप्रिंट नजर नहीं आ रहा।

बाजार 'भगवान भरोसे' छोड़ दिए गए हैं, लोग खुद ही जैसे-तैसे रास्ता बना रहे हैं और मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी महज 'मूकदर्शक' बने हुए हैं। महल, इतवारी, गांधीबाग, बड़ीं, जरीपटका, सदर, धरमपेठ और सक्करदरा जैसे मुख्य व्यापारिक केंद्रों में सड़कों और फुटपाथों पर अनधिकृत दुकानदारों और वेंडरों का कब्जा है।

ऊपर से सड़कों पर खड़ी बेतरतीब गाड़ियों ने स्थिति को और भयानक बना दिया है। प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त ट्रैफिक जवानों की तैनाती न होने से जाम की समस्या और ज्यादा गंभीर हो गई है। आयुक्त ने मिशन 100 डे की शुरुआत की थी लेकिन दिवाली के पूर्व कहीं भी मिशन की सफलता दिखाई नहीं दे रही है। वस्तुस्थिति उल्टी है और बाजारों में पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है।

प्रवर्तन विभाग की खुल रही पोल

मध्य नागपुर के पूर्व कॉर्पोरेटर संजय बालपांडे ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण विरोधी दस्ता शिकायतों को नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि मैंने यह मुद्दा जनरल बॉडी की बैठक में उठाया था और मेयर नीता ठाकरे ने भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन घरातल पर कुछ नहीं हुआ।

बाजार का नहीं करते रुख

  • विनोद जेठानी कहते है कि शहर में आवाजाही करना बेहद तनावपूर्ण हो गया है।

  • ट्रैफिक में लगने वाला समय कई गुना बढ़ गया है और हम एजेंसियों की नाकामी की कीमत चुका रहे हैं।

  • किसी भी मार्ग पर जाने के लिए अब घंटी लग रहे हैं। खरीदी का मूड चौपट कर दिया है। लोग इसलिए अब घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते।

  • खासकर शाम में बाजार की ओर रुख करना, अपने लिए सिरदर्द खड़ा करना हो गया है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या समन्वय की कमी है। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ अतिक्रमण का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती और न ही मनपा जन-बल की कमी का रोना रो सकती है

नागरिकों का गुस्सा फूटा

वेणुगोपाल अग्रवाल कहते हैं कि जब हर साल दिवाली पर भीड़ होना तय है तो प्रशासन पहले से योजना क्यों नहीं बनाता। अधिकारियों की नाकामी की सजा आम जनता क्यों भुगते नागपुर शहर के प्रमुख बाजारों से लोगों को आज भी लगाव है। सभी को पता है कि लोग आएंगे, इसके बाद भी व्यवस्था को सुचारु करने के लिए कोई कदम नहीं उठाये जाते हैं।

कुछ दिखता नहीं दस्ते को

आरती कुशवाह कहती है कि शिकायतों के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदलती जिससे समर्पित दस्तों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।

वे अपनी मर्जी से काम करते हैं। 'मेहरबानी' ज्यादा दिखाई देती है, जबकि कार्रवाई कम। दिखावे के लिए वाहन आते हैं और जाते हैं लेकिन बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों को कुछ भी दिखाई नहीं देता। पब्लिक हंसती भी है लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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