अन्नू कपूर (सौजन्य-IANS) 
नागपुर

'जैसी डिमांड, वैसी सप्लाई', अन्नू कपूर विथ नवभारत में खुलकर हुई बात, कहा- फिल्मों की विकृति के लिए..

Annu Kapoor with Navbharat: दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर ने फिल्मों की विकृति के लिए दर्शकों को जिम्मेदार ठहराया। नागपुर में आयोजित ‘नवभारत-नवराष्ट्र’ कार्यक्रम में अन्नू कपूर ने खुलकर बात की।

प्रिया जैस

Annu Kapoor with Navbharat: दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर ने कई दशक फिल्म इंडस्ट्री में बिताए हैं। इन सालों में कई तरह के रोल उन्होंने पर्दे पर निभाए तो कई बार वे अलग-अलग रूप में नजर आए। कभी प्रोड्यूसर, कभी होस्ट तो कभी अभिनेता। बॉलीवुड में 50 वर्षों से भी अधिक समय बिता चुके दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर कहते हैं कि बॉलीवुड वही परोस रहा है जो पब्लिक चाहती है।

1960 के दशक के दर्शक अलग थे और आज के अलग। अलग-अलग दर्शकों के लिए अलग-अलग तरह की फिल्में बन रही हैं। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। बदलते दौर में यह देखने को मिलेगा ही। ताली दोनों ओर से बज रही है, इसलिए किसी पर यह आरोप लगा देना की ‘वह’ समाज को विकृत कर रहा है, गलत है। विकृति रोकने की जिम्मेदारी ‘सामूहिक’ होनी चाहिए लेकिन यहां पर तो सभी कुछ ‘ईश्वर’ पर छोड़ दिया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कला एक क्रिएटिविटी है और यह किसी की जागीर नहीं हो सकती, इसलिए कलाकार अपनी कला के बल पर जिंदा रहता है और आगे बढ़ता है। अन्नू कपूर ‘नवभारत-नवराष्ट्र’ के कार्यक्रम ‘सुहाना समा’ के लिए नागपुर आए हुए हैं और इसी अवसर पर ‘संवाद’ कर रहे थे।

जैसी डिमांड, वैसी सप्लाई

अन्नू कपूर स्पष्ट कहते हैं कि फिल्मों का अस्तित्व अपनी जगह है। जब टीवी आया तो तमाम एक्टर्स ने कहा कि मैं सिनेमा का एक्टर हूं, टीवी में क्यों काम करूंगा। बड़े-बड़े महारथियों ने टीवी शोज में काम किया। ओटीटी से सिनेमा वाले डरेंगे नहीं बल्कि अच्छा सिनेमा बनाएंगे। बाकी जब बात अश्लीलता-विकृति की आती है तो ये ध्यान में रखना चाहिए कि जिस चीज की डिमांड होती है वही सप्लाई किया जाता है। ताली दोनों हाथों से बजती है। बाकी बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इस तरह का कॉन्टेंट देखने में जरा भी दिलचस्पी नहीं रहती। अपने यहां सिनेमा, क्रिकेट, कास्ट, करप्शन और शालीनता चलती रहेगी।

स्पर्धा बढ़ी, उम्र हुई कम

उनका कहना है कि पहले के दौर में स्पर्धा की काफी कमी थी। एक-दो हीरो-हिराइनों के साथ काम चल जाता था। तब भी फिल्में हिट होती थीं तो फेल भी। लेकिन कलाकारों को लोग याद रखते थे। अब आज के दौर में फिल्म इंडस्ट्रीज में स्पर्धा काफी बढ़ गई है। ये एक अच्छी चीज है। स्पर्धा अधिक होने से चीजों में सुधार देखने को मिलता है। इंडस्ट्रीज में भी सुधार हो रहा है। यह जरूर है कि स्पर्धा के युग में लोग लंबे समय तक काम नहीं कर पा रहे हैं। एक आता है तो दूसरा पीछे खड़ा हो जाता है। 1990 तक के दशक में लोग लंबे समय तक कार्य कर लेते थे।

सेंसर बोर्ड नीति बनाये या नीति को अमल में लाये

उन्होंने कहा कि फिल्मों में विवाद खड़ा करना आम बात है। इन दिनों विवाद काफी बढ़ गया है। इसके लिए सेंसर बोर्ड को नीति बनानी चाहिए। अगर सेंसर बोर्ड के पास नीति है तो नीति को कठोरता से लागू करना चाहिए लेकिन बीच की भूमिका निभाने से स्थिति और खराब होती चली जाएगी। बेहतर होगा सेंसर बोर्ड बेहतर भूमिका में आये जिससे विवादों को खत्म करने में आसानी होगी।

वे स्पष्ट कहते हैं कि कानून का झोल काफी बढ़ गया है। आज कानून है भी तो उसे अमल में लाने वाले नहीं हैं। हर क्षेत्र में इसके कारण परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। लोग कानून को तोड़ने का रास्ता निकाल लेते हैं। नया स्टार्टअप खड़ा हो जाता है। कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मियों को तत्काल ‘नकद’ पुरस्कार देना चाहिए।

आज गीत-संगीत और कहानी का दौर

सुरेश भट सभागृह में गुरुवार को ‘नवभारत-नवराष्ट्र’ के ‘सुहाना समा’ कार्यक्रम में अलग-अलग कहानियों के साथ गीत-संगीत का बेहतरीन दौर देखने को मिलेगा। कुछ देशभक्ति की कहानियां होंगी तो जाने- माने गायक गाने भी प्रस्तुत करेंगे। ‘मानाचा मुजरा’ भी पेश किया जाएगा। कपूर ने आश्वस्त किया है कि पूरी टीम नागपुर में एक यादगार कार्यक्रम पेश करेगी जिसे लंबे समय तक दर्शक याद रखेंगे।

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