Highlights
सितंबर 2023 की बाढ़ के बाद धरमपेठ जोन में नालों की सुरक्षा और निर्माण के लिए निधि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है।
विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, प्रभाग 14 में 16.35 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था।
23 फरवरी 2024 को जारी कार्यादेश के तहत ‘अभि इंजीनियरिंग’ को लगभग 13 करोड़ का काम दिए जाने का दावा है।
आरोप है कि रामगिरी झोपड़पट्टी-विकासनगर क्षेत्र में 480 मीटर की सुरक्षा दीवार का काम हाल में शुरू हुआ, जबकि रिकॉर्ड में परियोजना पूरी दिखाई गई।
Nagpur Municipal Corporation Corruption: नागपुर जिले में सितंबर-2023 में आई बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने के बाद विशेष रूप से धरमपेठ जोन में हुए नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने महानगरपालिका को निधि उपलब्ध कराई।
यहां तक कि जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट द्वारा इसे गंभीरता से लिए जाने के बाद नालों की सुरक्षा दीवार तुरंत प्रभाव में बनाने का भले ही निर्णय लिया गया हो किंतु हाई कोर्ट की नाराजगी को भी दरकिनार कर कार्य को टाला जाता रहा है।
आश्चर्यजनक यह है कि इसमें से 13 करोड़ रुपए खर्च कर नाले की सुरक्षा दीवार का काम गत कुछ दिनों से शुरू किया गया। इस संदर्भ में जानकारी देते हुए पार्षद अभिजीत झा ने कहा कि वर्ष 2024 में कार्यदिश जारी किया गया किंतु बाद में धरमपेठ जोन के कार्यकारी अभियंता रहे विजय गुरुवक्षानी और प्रमोद मोखाडे ने ठेकेदार को समय बढ़ाकर दिया जिससे यह कार्य अब तक नहीं हो पाया है।
प्राप्त विभागीय दस्तावेजों के अनुसार धरमपेठ जोन के प्रभाग 14 में बाढ़ नियंत्रण और नाला निर्माण के लिए 16.35 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। 23 फरवरी 2024 को जारी कार्य आदेश के तहत टेंडर प्रक्रिया में 19 प्रतिशत कम दर (लगभग 13 करोड़ रुपये) पर काम 'अभि इंजीनियरिंग' नामक एजेंसी को सौंपा गया था।
विभागीय रिकॉर्ड में इस पूरे प्रोजेक्ट को 'वर्क कंप्लीटेड' यानी पूर्ण दिखाया जा चुका है। हालांकि मौके की जांच में पाया गया कि रामगिरी झोपड़पट्टी विकासनगर स्थित 480 मीटर लंबे नाते की सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य महज 7 दिन पहले ही शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त सुरेंद्रगढ़ के फाल्के लेआउट तथा सिविल लाइंस स्थित ड्रीम पार्क सोसाइटी के पीछे नाला निर्माण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है।
नागपुर मनपा में भ्रष्टाचार की स्थिति यह है कि गोंडवाना क्लब से लेकर जटाशंकर मंदिर के आगे रुद्र माता मंदिर तथा रामगिरी के पीछे नाले तक 5 लाख रुपये की लागत से 112 मीटर लंबी 'डमी' सीवर लाइन बिछा दी गई।
एक साल बीत जाने के बाद भी इस लाइन से न तो सीवरेज का पानी बहता है और न ही चारिश का लेकिन इसके बावजूद ठेकेदार का बिल पास कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर, अंबाइारी थाने के पीछे नाला निर्माण कार्य एमडी कंस्ट्रक्शन को सब-लेट किया गया था जहां निरीक्षण के दौरान दीवार का फूलना (बल्ज होना) और शटरिंग प्लेटों में दिलाई जैसी गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई। धरमपेठ जोन में प्रशासक काल के दौरान जितने कार्य किए गए, उस समय कार्यकारी अभियंता विजय गुरुवधानी रहे हैं।
नेहाकासक काल के दौरान बरमपेड जीन में कार्यकारी अभियंता रहे विजय गुरुबानी के कार्यकाल के तमाम कार्यों की जांच होना जरूरी है। जांब होने पर मनया का अब तक गड़बड़झाला उजागर हो सकता है।
इसके कई उदाहरण उपलब्ध है। हालांकि इस संदर्भमें काफी समय से आपति उठाई जा रही है, इसके बावजूद उन्हें कौन बचा रहा है? यह समझ से परे है। उनके खिलाफ सबूत होने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
बहरहाल अब उनका तबादला अधीक्षक अभियंता के तौर पर मुख्यालय में होने के बाद भी उनकी कार्यप्रणाली सदेह के घेरे में है। प्रशासनिक रिकॉर्ड में जिन विकास कस्यों को आधिकारिक तौर पर साइट पर पूर्ण' वर्क कप्लीटेड दर्शाकर भुगतान स्वीकृत किए जा चुके है धरातल पर उन कामों का निर्माण कार्य महज कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ है या वे अब भी अधूरे पड़े हैं।
मेरे पास वर्तमान में न ती सीमेंट रोड के काम है और न ही कोई प्रकल्प के काम है। यहां तक कि मेरे पास डीपीडीसी के भी कार्य की कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
किक्य गुरुबधानी, अधीक्षक अभियंता मनया