महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

वो नेता जिसने इंदिरा के विरोध में छाेड़ा स्कूल, आज हैं सबसे अमीर सूबे के मुखिया

Devendra Fadnavis Birthday Special: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। फडणवीस बचपन में राजनीति में नहीं आना चाहते थे।

आकाश मसने

Devendra Fadnavis Birthday Special Story: 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं, लौटकर वापस आऊंगा।' इस लाइन ने महाराष्ट्र की राजनीति को बदल कर रख दिया। राज्य की दो बड़ी पार्टियां टूट गई और राज्य के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए। यह लाइन कही थी, भाजपा नेता देंवेंद्र फडणवीस ने।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज यानी 22 जुलाई 2025 को अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। नागपुर में जन्मे देवेंद्र फडणवीस आज भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वे छात्र जीवन से ही राजनीति में आ गए थे। उनके बारे में कई किस्से हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो बहुत ही कम लोगों को मालूम हैं। आइए जानते हैं देवेंद्र फडणवीस के कुछ अनसूने किस्से...

ऑटो रिक्शा से जाते थे विधानसभा

देवेंद्र फडणवीस जब पहली 1999 में बार विधायक बने थे तब वे बहुत युवा थे। उनकी उम्र केवल 29 साल थी। उस समय फडणवीस के पास न तो कोई गाड़ी थी और न ही कोई बड़ा राजनीतिक रसूख। वे साधारण परिवार से थे। उनके जानने वाले बताते है कि फडणवीस कभी-कभी नागपुर में विधानसभा जाने के लिए ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करते थे।

स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार उन्होंने देवेंद्र फडणवीस को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते हुए भी देखा। एक बार तो विधानसभा सत्र के दिन उन्हें ऑटो रिक्शा नहीं मिला, तो वे करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर विधानसभा भवन पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते हुए (सोर्स: सोशल मीडिया)

देवेंद्र फडणवीस नहीं बनाना चाहते थे छात्र नेता

देवेंद्र के पिता गंगाधर राव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ से जुड़े रहे। जब देवेंद्र फडणवीस नागपुर यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन पर छात्र राजनीति में शामिल होने का बहुत दबाव था। लेकिन उन्होंने शुरुआत में मना कर दिया क्योंकि वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहते थे।

हालांकि, एक बार कॉलेज में भ्रष्टाचार से जुड़ी एक घटना हुई। इस पर कोई भी छात्र खुलकर बोलने को तैयार नहीं था। तब देवेंद्र फडणवीस सामने आए और भष्ट्राचार के मुद्दे पर आवाज़ उठाई, जिसने अनजाने में उन्हें एक नेता बना दिया।

इस घटना ने देवेंद्र फडणवीस के जीवन की दिशा मोड़ दी। वे छात्र राजनीति में आ गए। इसके बाद वे नागपुर के पार्षद बने और फिर मेयर। उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया, और 2014 में पहली बार वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।

जब फडणवीस ने इंदिरा गांधी के विरोध में छोड़ा स्कूल

देवेंद्र फडणवीस के जीवन का एक और किस्सा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की। लेकिन इससे जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल, देश में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था इस समय देवेंद्र के पिता गंगाधर राव फडणवीस को गिरफ्तार कर लिया गया था। देवेंद्र ने इस गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने इंदिरा गांधी के नाम पर बने इस स्कूल से अपना नाम कटवा लिया था।

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