Nagpur Cyber Fraud News: नागपुर साइबर पुलिस थाना द्वारा साइबर ठगी के शिकार नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए रकम और गुम हुए मोबाइल लौटाने के साथ ही जनजागृति कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। विधि विशेषज्ञों और बैंक अधिकारियों द्वारा साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने का आहनवान किया गया, कार्यक्रम अध्यक्षता सीपी रवींद्र कुमार सिंगल ने की। उन्होंने पीड़ितों को बताया कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान ही नहीं है। यदि कोई कॉल करके खुद को पुलिस अधिकारी बताकर धमका रहा है, तो वह फ्रॉड है।
पुलिस भवन में आयोजित कार्यक्रम में एमएनएलयू की विधि प्राध्यापक डॉ. दिशा खरे, भारतीय रिजर्व बैंक नागपुर के सहायक प्रबंधक पीयूष तेलरांधे, साइबर विशेषज्ञ हिमांशु जोशी तथा डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने नागरिकों को मार्गदर्शन दिया।
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी किसी भी धमकी से न डरें क्योंकि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, लिंक या एप डाउनलीड न करें। मोबाइल एप केवल अधिकृत प्ले स्टोर या एप स्टोर से ही डाउनलोड करें, यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा 1945 पर संपर्क करें।
साइबर पुलिस के अनुसार, हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने के मामलों में वृद्धि हुई है। ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं।
उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट होने का दावा करते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर बैंक खाती में पैसे जमा करवाए जाते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालब देकर नकली ट्रेडिंग एप डाउनलोड करवाए जाते हैं। निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है।