Maharashtra Government Hostel Admissions: नागपुर महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के उप-वर्गीकरण का मुद्दा इन दिनों गरमाया हुआ है। इस बीच समाज कल्याण विभाग द्वारा सरकारी छात्रावासों में प्रवेश के लिए जारी किए गए एक विज्ञापन ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस विज्ञापन में सीटों के आवंटन में जातियों का उप-वर्गीकरण किए जाने का आरोप है, जिसके कारण छात्रों और विभिन्न संगठनों में भारी रोष है।
उल्लेखनीय है कि सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति, विमुक्त जाति एवं घुमंतू जमाती (वीजेएनटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए चलाए जा रहे सरकारी छात्रावासों में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूली छात्रों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून है, जबकि 11वीं और गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए यह 15 जुलाई तय की गई है। विवाद का मुख्य कारण यह है कि प्रवेश के इस विज्ञापन में अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के लिए सीटों को 'मांग', 'मेहतर' और 'अन्य एससी' के रूप में अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है।
युवा ग्रेजुएट फोरम ने इस विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार ने अभी तक उप-वर्गीकरण लागू नहीं किया है, तो सामाजिक न्याय विभाग ने किस कानूनी अधिकार के तहत छात्रावास की सीटों का वर्गीकरण किया है। फोरम ने इस कदम को बेहद गंभीर, आपत्तिजनक और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला करार दिया। फोरम ने क्षेत्रीय उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा।
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भारतीय संविधान अनुसूचित जातियों को व्यापक संवैधानिक संरक्षण प्रदान करता है, फिर भी जाति आधारित यह विभाजन सामाजिक एकता के लिए खतरा है। छात्रों के लिए शैक्षिक अवसरों का ऐसा विभाजन सामाजिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध है।
- यूथ ग्रेजुएट फोरम, अतुल खोबरागड़े
विज्ञापन में कोई गलती नहीं है। 1984 से ऐसे कई सरकारी आदेश जारी किए गए है। उन्हीं के आधार पर छात्रावासों में प्रवेश दिए जाते हैं। ये प्रवेश नए शैक्षणिक सत्र के लिए हैं। इस मामले में विभाग का कोई अलग दृष्टिकोण नहीं है। इसे विवाद का मुद्दा बनाना गलत है।
- समाज कल्याण विभाग, सहायक आयुक्त, सुकेशिनी तेलगोटे